रविवार, 13 नवंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 4) 14 Nov

🌹 समय का सदुपयोग करना सीखें

🔵 सचमुच जो व्यक्ति काम से बचने, जी चुराने के कारण अब के काम को तब के लिए टालकर अपने बहुमूल्य क्षणों को आलस्य-प्रमाद, विलास-विनोद में व्यर्थ नष्ट करते रहते हैं। निश्चय ही समय उन्हें अनेकों सफलताओं से वंचित कर देता है। फसल की सामयिक आवश्यकताओं को तत्काल पूरा न कर आगे के लिए टालने वाले किसान की फसल चौपट होना स्वाभाविक है। जो विद्यार्थी वर्ष के अन्त तक अपनी तैयारी का प्रश्न टालते रहते हैं, सोचते हैं—‘‘अभी तो काफी समय पड़ा है फिर पढ़ लेंगे’’ वे परीक्षा काल के नजदीक आते ही बड़े भारी क्रम को देखकर घबरा जाते हैं और कुछ भी नहीं कर पाते।

🔴 फलतः उनकी सफलता की आशा दुराशा मात्र बनकर रह जाती है। कुछ भाग-दौड़ करके सफल भी हो जांय तो भी वे दूसरों से निम्न श्रेणी में ही रहते हैं। अपने वायदे सौदे, लेन-देन आदि को आगे के लिए टालते रहने वाले व्यापारी का काम-धन्धा चौपट हो जाय तो इसमें कोई संदेह नहीं। यही बात वेतन भोगी कर्मचारियों पर भी लागू होती है। टालमटोल की आदत के कारण उन्हें प्रस्तुत कार्य से सम्बन्धित व्यक्तियों एवं अपने बड़े अफसरों का कोपभाजन तो बनना ही पड़ता है, साथ ही विश्वसनीयता भी जाती रहती है।

🔵 कई लोगों में अच्छी प्रतिभा, बुद्धि होती है, शक्ति-सामर्थ्य भी होती है। उन्हें जीवन में उचित अवसर भी मिलते हैं किन्तु टालमटोल की अपने बुरी आदत के कारण वे अपनी इन विशेषताओं से कोई लाभ नहीं उठा पाते और दीन-हीन अवस्था में ही पड़े रहते हैं। साहित्यकार, कलाकार आदि का गया हुआ समय जिसमें वे नव रचना, नव सृजन करके जीविकोपार्जन कर सकते थे, वह लौटकर फिर कभी नहीं आता। निश्चय ही किसी काम को आगे के लिए टालते रहना दुष्परिणाम ही प्रस्तुत करता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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