रविवार, 13 नवंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 16)

🌹 युग-निर्माण योजना का शत-सूत्री कार्यक्रम

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11 वनस्पतियों का उत्पादन— शाक, फल, वृक्ष और पुष्पों के उत्पन्न करने का आन्दोलन स्वास्थ्य संवर्धन की दृष्टि से बड़ा उपयोगी हो सकता है। घरों के आस-पास फूल उगाने, छप्परों पर लौकी, तोरई, सेम आदि की बेल चढ़ाने, आंगन में तुलसी का विरवा रोपने तथा जहां भी खाली जगह हो वहां फूल, पौधे लगा देने का प्रयत्न करना चाहिये। केला-पपीता आदि थोड़ी जगह होने पर भी लग सकते हैं। *कोठियों बंगलों में अक्सर थोड़ी जगह खाली रहती है वहां शाक एवं फूलों को आसानी से उगाया जा सकता है। लगाने, सींचने, गोड़ने, मेंड़ बनाने आदि का काम घर के लोग किया करें तो उससे श्रमशीलता की आदत पड़ेगी और स्वास्थ्य सुधरेगा।*

🔴 *किसानों को शाक और फलों की खेती करने की प्रेरणा देनी चाहिये जिससे उन्हें लाभ भी अधिक मिले और स्वास्थ्य सम्बन्धी एक बड़ी आवश्यकता की पूर्ति भी होने लगे।* जहां-तहां बड़े-बड़े वृक्षों को लगाना लोग पुण्य कार्य समझें। रास्तों के सहारे पेड़ लगाये जांय। बाग बगीचे लगाने की जन रुचि उत्पन्न की जाय। वायु की शुद्धि, वर्षा की अधिकता, फल, छाया, लकड़ी आदि की प्राप्ति, हरियाली से चित्त की प्रसन्नता, भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ना, आदि अनेकों लाभ वृक्षों से होते हैं।

🔵 यह प्रवृत्ति जनसाधारण में पैदा करके संसार में हरियाली और शोभा बढ़ानी चाहिये। *आवश्यक वस्तुओं के बीज, गमले, पौधे आदि आसानी से मिल सकें ऐसा प्रबन्ध करना चाहिये। हो सके तो घर-घर जाकर इस सम्बन्ध में लोगों का मार्ग दर्शन करना चाहिये।* जड़ी बूटियों के उद्यान एवं फार्म लगाने का प्रयत्न करना भी स्वास्थ्य संवर्धन की दृष्टि से आवश्यक है। *पंसारियों की दुकानों पर सड़ी गली, वर्षों पुरानी, गुणहीन जड़ी-बूटियां मिलती हैं। उनसे बनी आयुर्वेदिक औषधियां भला क्या लाभ करेंगी? इस कमी को पूरी करने के लिये जड़ी बूटियों की कृषि की जानी चाहिये* और चिकित्सा की एक बहुत बड़ी आवश्यकता को पूरा करने का प्रयत्न होना चाहिये।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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👉 लक्ष्मीजी का निवास

🔶 एक बूढे सेठ थे। वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव। आज यहाँ तो कल वहाँ!! 🔷 सेठ ...