शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

👉 शेखी मत बघारो

🔴 अभिमान और तुच्छता, आत्मप्रशंसा और शेखी के रूप में प्रकट होते हैं, जिससे आप का सामाजिक जीवन सबके लिए असह्य और अनाकर्षक बन जाता है। जनता आप की प्रशंसा कर सकती है, किंतु वह उसको के मुख से सुनना नहीं चाहती। यदि आप अपनी प्रशंसा न्याय और सत्य के अनुसार भी करते हों, तो भी जनता विरोधी हो जाती है और आप के दोषों को ही देखने लगती है। अपनी सफलता को ऐतिहासिक स्त्री- पुरुषों के कार्यों से तुलना करके नम्रता सीखो।   

🔵 ऊँट तभी तक अपने को ऊँचा समझता है, जब तक पहाड़ के नीचे नहीं आता। अपने से बड़े प्रसिद्ध पुरुषों से मिलते- जुलते रहने का उद्योग करो। इस प्रकार की मित्रता आप को अत्यंत प्रभावपूर्ण नम्रता की शिक्षा देगी। इस बात को स्मरण रखो कि अभिमान से आप बहुत कुछ खो देते हो। अभिमानी की बहुत से मनुष्य न प्रशंसा करते, न सहायता करते और न प्रेम करते हैं। अभिमान आप के व्यक्तिगत विकास को भी रोकता है।

🔴 यदि आप अपने को सबसे बड़ा समझने लगोगे तो आप अधिक बड़ा बनने का यत्न करना छोड़ दोगे। यदि आपने कोई कार्य ख्याति तथा विज्ञापन योग्य किया है, तो उसके विषय में स्वयं कुछ मत कहो। आप को पता लगेगा कि उसके विषय में दूसरे भी किसी न किसी प्रकार कुछ अवश्य जानते हैं। आप के गुण अधिक समय तक छिपे नहीं रहेंगे। आप को स्वयं उनकी घोषणा करने  की आवश्यकता नहीं है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 -अखण्ड ज्योति- अग. 1945 पृष्ठ 20
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1945/August/v1.20

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