गुरुवार, 2 सितंबर 2021

👉 तत्व दृष्टि से बन्धन मुक्ति (भाग ५७)

असीम को खोजें

सूर्य की दूरी पृथ्वी से सवा नौ करोड़ मील है। इसके बाद का सबसे निकटवर्ती तारा 2,50,00,00,00,00,000 मील दूरी पर है। अन्य तारे तो इससे भी लाखों गुनी दूरी पर हैं। इस दूरी का हिसाब रखने के लिए ‘प्रकाश वर्ष’ का नया पैमाना बनाया गया है। प्रकाश की किरणें एक सैकिण्ड में एक लाख छियासी हजार मील की चाल से चलती हैं। इस गति से चलते हुए प्रकाश एक वर्ष में जितनी दूरी तय करले उसे एक प्रकाश वर्ष कहा जायेगा। इस पैमाने के हिसाब से पृथ्वी से सूर्य की दूरी सिर्फ सवा आठ प्रकाश सैकिण्ड रह जाती है। इसके आगे किसी और तारे की खोज में आगे बढ़ा जाय तो सबसे निकटवर्ती तारा सवा चार प्रकाश वर्ष चल लेने के बाद ही मिलेगा।

ब्रह्माण्ड का 99 प्रतिशत भाग शून्य है। एक प्रतिशत भाग को ही ग्रह नक्षत्र घेरे हुए हैं। अनुमान है कि आकाश में सूर्य जैसे अरबों तारकों का अस्तित्व है। वह तारे आकाश गंगाओं से जुड़े हैं। वे उसी से निकले हैं और उसी से बंधे हैं। मुर्गी अण्डे देती है उन्हें सेती है और जब तक बच्चे समर्थ नहीं हो जाते उन्हें अपने साथ ही लिए फिरती है। आकाश गंगाएं ऐसी ही मुर्गियां हैं जिनके अण्डे बच्चों की गणना करना पूरा सिर दर्द है। हमारी आकाश गंगा एक लाख प्रकाश वर्ष लम्बी और 20 हजार प्रकाश वर्ष मोटी है। सूर्य इसी मुर्गी का एक छोटा चूजा है जो अपनी माता से 33000 प्रकाश वर्ष दूर रहकर उसकी प्रदक्षिणा 170 मील प्रति सैकिण्ड की गति से करता है। आकाश गंगायें भी आकाश में करोड़ों हैं। वे आपस में टकरा न जायें या उनके अण्डे-बच्चे एक-दूसरे से उलझ न पड़ें इसलिए उनने अपने सैर-सपाटे के लिए काफी-काफी बड़ा क्षेत्र हथिया लिया है। प्रायः ये आकाशगंगाएं एक-दूसरे से 20 लाख प्रकाश वर्ष दूर रहती हैं।

अब तक खोजे गये तारकों में सबसे बड़ा ‘काला तारा’ है। यह अपने सूर्य से 20 अरब गुना बड़ा है। यहां यह भूलना नहीं चाहिए कि सूर्य अपनी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है। उस हिसाब से पृथ्वी की तुलना में काला तारा कितना बड़ा होगा उसे कागज पर जोड़ लेना तो सरल है पर उस विस्तार को मस्तिष्क में यथावत बिठा सकना बहुत ही कठिन है।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 तत्व दृष्टि से बन्धन मुक्ति पृष्ठ ९३
परम पूज्य गुरुदेव ने यह पुस्तक 1979 में लिखी थी

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