गुरुवार, 15 अक्तूबर 2020

👉 कुढ़न की असाध्य बीमारी

कुढ़न एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं। आपकी स्थिति को दूसरों की तुलना से हीन मानकर कितने ही व्यक्ति असन्तोष में कुढ़ते रहते हैं। पुरुषार्थ के अभाव में प्रयत्नपूर्वक वे उस ऊँची स्थिति तक पहुँचने का साहस तो करते नहीं, उलटे जो आगे बढ़े हुए हैं उनमें ईर्ष्या करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि यदि आगे बढ़े हुए की टाँग पकड़ कर पीछे घसीट लिया जाय या आगे बढ़ने से रोक दिया जाय तो विषमता की स्थिति दूर हो सकती है। ईर्ष्या में यही भाव छिपा रहता है। 

दूसरों की प्रशंसा या बढ़ती सहन न कर सकने में ईर्ष्यालु की महत्वाकाँक्षा छिपी रहती है। वह अपने से बड़े समझे जाने वालों की तुलना में अपने को हीन समझा जाना पसन्द नहीं करता। इस कमी को प्रयत्न और पुरुषार्थ द्वारा स्वयं उन्नति करके पूरा किया जा सकता है, पर इस कठिन मार्ग पर चलने की अपेक्षा लोग ठीक समझते हैं कि आगे बढ़े हुओं को घसीटा जाय, उनकी निन्दा की जाय या हानि पहुँचाई जाय। ईर्ष्यालु लोग ऐसा ही कुछ किया करते हैं। कुछ आगे बढ़े हुए लोग अपने से छोटों को बढ़ते नहीं देखना चाहते। वे सोचते हैं यह यदि बढ़कर मेरी बराबर आ जावेंगे तो फिर मेरी क्या विशेषता रहेगी? इसलिए बढ़ते हुओं को ऊपर उठने से पहले ही दबा देना चाहिए।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति जून 1962 

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