सोमवार, 7 अक्तूबर 2019

👉 आध्यात्मिक तेज का प्रज्वलित पुंज होता है चिकित्सक (भाग ७५)

👉 जीवनशैली आध्यात्मिक हो

आध्यात्मिक चिकित्सक उनके इस दर्द को अपने दिल की गहराइयों में महसूस करते हैं। क्योंकि उन्हें इस सच्चाई का पता है कि यथार्थ में कोई भी बुरा या डरपोक नहीं है। सभी में प्रभु का सनातन अंश है। प्रत्येक व्यक्ति अपने भूल रूप में परम दिव्य होने के साथ साहस और सद्गुणों का भण्डार है। बस हुआ इतना ही है कि किन्हीं कारणों से उसकी अन्तर्चेतना में कुछ गाँठें पड़ गई है, जिसकी वजह से उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह रुक गया है। यदि ये गाँठें खोल दी जाय तो फिर स्थिति बदल सकती है। हाँ इतना जरूर है कि ये गाँठें बचपन की भी हो सकती हैं और पिछले जीवन की भी। पर यह सौ फीसदी सच है कि व्यक्ति को बुरा या डरपोक बनाने में इन्हीं का प्रभाव काम करता है।

इस सच को अधिक जानने के लिए हमें व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया में प्रवेश करना पड़ेगा। किसी का बचपन उसके व्यक्तित्व का अंकुरण है। इसके बढ़तेक्रम में व्यक्तित्व भी बढ़ता है। इस अवधि में कोई भी घटना का मन- मस्तिष्क पर गहरा असर होता है। अब यदि किसी बच्चे को बार- बार अँधेरे से अथवा कुत्ते से डराय जाय और यदि यह डर गहरा होकर किसी मनोग्रंथि का रूप ले ले तो फिर यह बच्चा मन अपनी पूरी उम्र अँधेरे और कुत्तों से डरता रहेगा। यही स्थिति भावनात्मक आघात के बारे में है। जिन्हें हम बुरे और असामाजिक लोग कहते हैं, उनमें से कोई बुरा और असामाजिक नहीं होता। भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से उपजे विरोध के स्वर, उपजी विकृतियाँ उन्हें बुरा बना देती हैं। यदि इन  मनोग्रंथियों को खोल दिया जाय तो सब कुछ बदल सकता है।

आध्यात्मिक व्यवहार चिकित्सा में चिकित्सक सबसे पहले उसकी पीड़ा- परेशानी को भली प्रकार समझता है। अपने आत्मीय सम्बन्धों व अन्तर्दृष्टि के द्वारा उसकी मनोग्रन्थि के स्वरूप व स्थिति का आँकलन करता है। इसके बाद किसी उपयुक्त आध्यात्मिक तकनीक के द्वारा उसकी इस जटिल मनोग्रन्थि को खोलता है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे यह जरूरी है कि चिकित्सक के व्यक्तित्व पर रोगी की गहरी आस्था हो। फिर सब कुछ ठीक होने लगता है। उदाहरण के लिए यदि बात किसी अँधेरे भयग्रस्त रोगी की है तो चिकित्सक सब से पहले अँधेरे के यथार्थ से वैचारिक परिचय करायेगा। फिर इसके बारे में और भी अधिक गहराई बतायेगा। बाद में उसे स्वयं लेकर उस अँधेरे स्थान पर ले जायेगा। जहाँ उसे डर लगा करता है। इस पूरी प्रक्रिया में जप या ध्यान की तकनीकों का उपयोग भी हो सकता है, क्योंकि इससे मनोग्रंथियाँ आसानी से खुलती हैं।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 आध्यात्मिक चिकित्सा एक समग्र उपचार पद्धति पृष्ठ १०४

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