शनिवार, 5 अक्तूबर 2019

👉 मंत्री की तरकीब

राजा कर्मवीर अपनी प्रजा के स्वभाव से दुखी रहता था। उसके राज्य के लोग बेहद आलसी थे। वे कोई काम नहीं करना चाहते थे। अपनी जिम्मेदारी वे दूसरों पर टाल दिया करते थे। वे सोचते थे कि सारा काम राज्य की ओर से ही किया जाएगा। राजा ने अनेक माध्यमों से उन्हें यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी भी राज्य में नागरिकों की भी कुछ जिम्मेदारी होती है। राजा ने कई बार सख्त उपाय भी किए पर उनमें कोई सुधार नहीं हुआ।

एक दिन मंत्री ने राजा को एक तरकीब सुझाई। नगर के बीच चौराहे पर एक पत्थर डाल दिया गया, जिससे आधा रास्ता रुक गया। सुबह-सुबह एक व्यापारी घोड़ागाड़ी से वहां पहुंचा। जब कोचवान ने उसे पत्थर के बारे में बताया तो उसने गाड़ी मुड़वा ली और दूसरे रास्ते से चला गया। कई राहगीर इसी तरह लौट गए। तभी एक गरीब किसान आया। उसने आसपास खेल रहे लड़कों को बुलवाया और उनके साथ मिलकर पत्थर हटा दिया। पत्थर हटते ही वहां एक कागज नजर आया, जिस पर लिखा था-इसे राजा तक पहुंचाओ। किसी को कुछ समझ में नहीं आया। किसान कागज लेकर राजा के पास पहुंचा। राजा ने किसान को भरपूर इनाम दिया। यह बात राज्य भर में फैल गई। इनाम के लालच में अब लोग इस तरह के कई काम करने लग गए। धीरे-धीरे यह उनकी आदत में शामिल हो गया।

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