शनिवार, 28 सितंबर 2019

👉 पुनर्गठन का स्वरूप-

निर्णय किया गया है कि जो नियमित रूप से इस विचारधारा के संपर्क में रहने के लिए आतुर रहते हैं, समय पर यह आहार न मिलने से बेचैनी अनुभव करते हैं और तलाश के लिए हाथ पैर पीटते हैं, उन सबको परिजन सदस्य मानेंगे। नये नामांकन उन्हीं के होंगे और उन्हीं के व्यक्तिगत परिचय सुरक्षित रजिस्टर में नोट किये जावेंगे। इन परिचयों के आधार पर उनकी स्थिति समझना एवं विचारों का आवश्यक आदान प्रदान भी सम्भव हो सकेगा।

कर्मठ कार्यकर्ताओं की श्रेणी इससे ऊँची है। उन्हें व्रतधारी कह सकते हैं। न्यूनतम एक घण्टा समय और दस पैसा प्रतिदिन ज्ञान यज्ञ के लिए जो लगाते हैं उनकी श्रद्धा ने कर्मक्षेत्र में प्रवेश पा लिया ऐसा माना जा सकता है।

संक्षेप में भविष्य के युग निर्माण परिवार में तीन प्रकार के परिजन होंगे-
१- सहयोगी समर्थक स्नेही परिचित (2) पत्रिकाओं के सदस्य नियमित पाठक एवं सुनने वाले (3) अंशदान प्रस्तुत करके मिशन की सक्रिय सहायता करने वाले। इन तीनों में से सहयोगी श्रेणी का नामांकन स्थानीय शाखाओं में ही नोट रहेगा। इनका पंजीकरण हमारे लिए सम्भवं नहीं। इनकी संख्या तो लाखों की संख्या पार करके करोड़ों तक पहुँचेगी।
शान्तिकुञ्ज एवं गायत्री तपोभूमि में (1) पत्रिकाओं के नियमित सदस्यों, पाठकों का तथा (2) अंशदान करने वाले व्रतधारी कर्मनिष्ठों का ही रिकार्ड रहेगा। इन दोनों को मिलाकर स्थानीय संगठन की इकाइयाँ बना दी जायेगी। परिवार का पुनर्गठन इसी आधार पर होगा। विभिन्न प्रकार के आदान प्रदानों की शृंखला इसी परिवार के बीच चलेगी। मिशन के भविष्य का उत्तरदायित्व इन्हीं प्राणवान परिजनों के कन्धे पर डाला जायेगा। इस हस्तान्तरण के उपरान्त ही हम अपनी निकटवर्ती विदाई के लिए शान्तिपूर्वक महाप्रयाण कर सकेंगे।

पुनर्गठन की योजना यह है कि जहाँ श्री अखण्ड ज्योति, युग निर्माण, महिला जागृति आदि मिशन की पत्रिकाओं के न्यूनतम 10 सदस्य हैं, वहाँ उनका एक युग निर्माण परिवार गठित कर दिया जाय। इसी दृष्टि से पत्रिकाओं के सदस्यों का सर्वेक्षण प्रारम्भ भी कर दिया गया है। संख्या को महत्व न देकर हमें स्तर की गरिमा स्वीकार करनी होगी। अस्तु विचार है कि जो मिशन का स्वरूप ठीक तरह समझते हैं और सही दिशा में कदम बढ़ाने के लिए सहमत हैं, उन्हें ही साथ लेकर चला जाय।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति जुलाई १९७७ पृष्ठ ५३

http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1977/July/v1.53

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन की सफलता

जीवन ऊर्जा का महासागर है। काल के किनारे पर अगणित अन्तहीन ऊर्जा की लहरें टकराती रहती हैं। इनकी न कोई शुरुआत है, और न कोई अन्त; बस मध्य है...