शनिवार, 17 अगस्त 2019

👉 मोहग्रस्त नहीं विवेकवान

पहले ही कहा जा चुका है कि परिवार के प्रति हमें सच्चे अर्थों में कर्तव्यपरायण और उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाला होना चाहिये आज मोह के तमसाच्छन्न वातावरण में जहां बड़े लोग छोटों के लिये दौलत छोड़ने की हविस में और उन्हीं की गुलामी करने में मरते-खपते रहते हैं, वहाँ घर वाले भी इस शहद की मक्खी को हाथ से नहीं निकलने देना चाहते जिसकी कमाई पर दूसरे ही गुलछर्रे उड़ाते हैं। आज के स्त्री बच्चे यह बिलकुल पसन्द नहीं करते कि उनका पिता या पति उनके लाभ देने के अतिरिक्त लोक-मंगल जैसे कार्यों में कुछ समय या धन खर्च करें। इस दिशा में कुछ करने पर घर का विरोध सहना पड़ता। उन्हें आशंका रहती है कि कहीं इस और दिलचस्पी लेने लगे तो अपने लिये जो मिलता था उसका प्रवाह दूसरी ओर मुड़ जायेगा।

ऐसी दशा में स्वार्थ संकीर्णता के वातावरण में पले उन लोगों का विरोध उनकी दृष्टि में उचित भी है, पर उच्चादर्शों की पूर्ति उनके अनुगमन से सम्भव ही नहीं रहती। यह सोचना क्लिष्ट कल्पना है कि घर वालों को सहमत करने के बाद तब परमार्थ के लिये कदम उठायेंगे। यह पूरा जीवन समाप्त हो जाने पर भी सम्भव न होगा। जिन्हें वस्तुतः कुछ करना हो उन्हें अज्ञानग्रस्त समाज के विरोध की चिन्ता न करने की तरह परिवार के अनुचित प्रतिबन्धों को भी उपेक्षा के गर्त में ही डालना पड़ेगा। घर वाले जो कहें जो चाहे वहीं किया जाये यह आवश्यक नहीं।

हमें मोहग्रस्त नहीं विवेकवान होना चाहिए। और पारिवारिक कर्तव्यों की उचित मर्यादा का पालन करते हुए उन लोभ एवं मोह भरे अनुबन्धों की उपेक्षा ही करनी चाहिए जो हमारी क्षमता को लोक मंगल में न लगने देकर कुटुम्बियों की ही सुख-सुविधा में नियोजित किये रहना चाहते हैं। इस प्रकार का पारिवारिक विरोध आरम्भ में हर महामानव और श्रेयपथ के पथिक को सहना पड़ा है। अनुकूलता पीछे आ गई यह बात दूसरी पर आरम्भ में श्रेयार्थी को परिवार के इशारे पर गतिविधियां निर्धारित करने की अपेक्षा आत्मा की पुकार के ही प्रधानता देने का निर्णय करना पड़ा है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति, जून १९७१, पृष्ठ ५९
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1971/June/v1.59

1 टिप्पणी:

vijay ने कहा…

I am not able to do it in spite of having an internal wish to do so - to share some money of my own earning to needy and poor person irrespective of caste , creed and color.

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