शनिवार, 13 जनवरी 2018

👉 कोढ़ी का अभ्युत्थान

🔷 बंगाल के राजमहल जिले के रूप और सनातन नामक दो भगवद् भक्त हुए है। सनातन को कोढ़ था। चैतन्य महाप्रभु से सनातन की भेंट हुई, उन्हें मालूम हुआ कि यह भगवद् भक्त है तो उन्होंने यह जानते हुए भी कि यह कोढ़ी है, उठा कर छाती से लग लिया। कोढ़ का मवाद उनके शरीर पर लग गया तो भी उनने उससे किसी प्रकार की घृणा न की। उन्होंने सनातन को पढ़ाया भी। उस शिक्षा के आधार पर सनातन ने भक्ति रस के कई ग्रन्थ भी लिखे। कोढ़ी होते हुए भी वे महान भगवद् भक्त बन सके।

🔶 पतित और तुच्छ दीखने वाले में भी कितनी ही ऐसी आत्माऐं होती है जिन्हें उत्कर्ष का अवसर मिले तो वे महान बन सकती है।

👉 जो चाहोगे सो पाओगे !

🔶 एक साधु था, वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, ”जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे।” बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर...