सोमवार, 17 जुलाई 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 17 July

🔴 आकांक्षाओं के अनुरूप परिस्थितियाँ उपलब्ध कर लेना हर किसी के लिए संभव नहीं, ऐसे सुयोग तो किसी विरलों को ही मिलते हैं। आकाँक्षाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं, एक गरीब आदमी बे रोक टोक राजा बनने के सपने देख सकता है। पर इसके लिए जिस योग्यता, परिस्थिति, एवं साधना सामग्री की जरूरत है उसे जुटा लेना कठिन है, हमारी आकाँक्षाएं बहुधा ऐसी होती हैं जिनका वर्तमान परिस्थितियों से मेल नहीं खाता इसलिए उनका पूरा होना प्रायः बहुत कठिन होता है। ऐसे बुद्धिमान लोग विरले ही होते हैं जो अपनी वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप आकाँक्षाएं करते हैं और उनके पूर्ण होने पर सफलता एवं प्रसन्नता का सुख अनुभव करते हैं।

🔵 दुख और क्लेशों की आग में जलने से बचने की जिन्हें इच्छा है उन्हें पहला काम यह करना चाहिए कि अपनी आकाँक्षाओं को सीमित रखें। अपनी वर्तमान परिस्थिति में प्रसन्न और संतुष्ट रहने की आदत डालें। गीता के अनासक्त कर्मयोग का तात्पर्य वही है कि महत्वाकांक्षायें वस्तुओं की न करके केवल कर्तव्य पालन की करें। यदि मनुष्य किसी वस्तु की आकाँक्षा करता है और उसे प्राप्त भी कर लेता है तो उस प्राप्ति के समय उसे बड़ी प्रसन्नता होती है। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति सर्वांगीण आत्मोन्नति के प्रयत्न कर कर्तव्य पालन करने की आकाँक्षा करे तो उसे सफलता मिलते समय मिलने वाले आनन्द की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती, वरन् जिस क्षण में कर्तव्य पालन आरम्भ करता है उसी समय से आकाँक्षा की पूर्ति आरम्भ हो जाती है और साथ ही सफलता का आनन्द भी मिलता चलता है।

🔴 वही दुःखी है जिसकी तृष्णा विशाल है, जो नित्य नई-नई चीजों, विलास सामग्रियों की कामना किया करता है रुपये की प्राप्ति की दुर्दमनीय इच्छा की पूर्ति के लिए दिन रात कोल्हू के बैल की तरह जुता रहता है। तृष्णा दुःख का मूल है। गरीब वह नहीं है, जिसके पास कम है, बल्कि वह जो अधिक चाहता है। धनवान होते हुए भी जिसकी धनेच्छा दूर नहीं हुई, वह सबसे अधिक अभागा है। वह भी एक प्रकार के नर्क में निवास करता है। जिसने अपनी कामनाओं और वासनाओं का दमन करके मन को जीत लिया है, उसने स्वर्ग पाया है।
                                        
🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...