शुक्रवार, 16 जून 2017

👉 नारी जागरण की दूरगामी सम्भावनाएँ (अंतिम भाग)

🔵 हर किसी को समझना और समझाया जाना है कि नारी आद्यशक्ति है। वही सृष्टि को उत्पन्न करने वाली, अपने स्तर के अनुरूप परिवार का तथा भावी पीढ़ी का सृजन करने में पूरी तरह समर्थ है। इक्कीसवीं सदी में उसी का वर्चस्व प्रधान रहने वाला है। नर ने अपनी कठोर प्रकृति के आधार पर पराक्रम भले ही कितना ही क्यों न किया हो, पर उसी की अहंकारी उद्दंडता ने अनाचार का माहौल बनाया है। स्रष्टा की इच्छा है कि स्नेह, सहयोग, सृजन करुणा, सेवा और मैत्री जैसी विभूतियों को संसार पर बरसने का अवसर मिले, ताकि युद्ध जैसी अनेकानेक दुष्टताओं को सदा सर्वदा के लिए अन्त हो सके। इस भविष्यता को स्वीकार करने के लिए लोक मानस को समझाया और दबाया जाना चाहिए कि व नारी को समता से ही नहीं, वरिष्ठता से भी लाभान्वित करें।

🔴 ‘सतयुग की वापसी’ का शुभारम्भ करना वर्तमान जन समुदाय का काम है। ढाँचा और तंत्र खड़ा करना, सरंजाम जुटाना और वातावरण बनाना उसी का काम है। पर उन सभी उत्तरदायित्वों को अगली पीढ़ी के ही कंधों को उठाना होगा। आज जो पौधे लगाए जा रहे हैं उनके द्वारा विकसित हुए वृक्षों की शोभा सुषमा को सुरक्षित रखने का कार्य तो वे ही करेंगे, जो आज भले ही जन्में हों, जन्मने जा रहे हों, पर आवश्यकता के समय तक प्रौढ़ परिपक्व होकर रहेंगे।

🔵 ऐसा समुन्नत पीढ़ी को जन्म दे सकना तथा सुसंस्कृत बनाना उन नारियों के लिए ही सम्भव हो सकेगा जो आज के महान अभ्युदय में भागीदार बनकर नव सृजन की महती भूमिका निभाने में किसी न किसी प्रकार अपनी विशिष्टता का परिचय देंगी। आज के नारी जागरण आन्दोलन को भविष्य में अतिशय प्रभावित करने वाला बनाना भी इसका एक महान उद्देश्य है।

🌹 समाप्त
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1988 पृष्ठ 60

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