शुक्रवार, 30 जून 2017

👉 कायाकल्प का मर्म और दर्शन (भाग 9)

🔴 आप जागरूक रहिए। आप उदार तो रहें; लेकिन भलमनसाहत को उस सीमा तक मत ले जाएँ, कि आपकी जागरूकता ही चली जाए। दुनिया में बहुत अच्छे आदमी हैं; लेकिन बुरे आदमी भी कम नहीं हैं। बुरे आदमियों के प्रति आपको जागरूक रहना चाहिए, कोई आप पर हमला न कर दे, कोई आपकी भलमनसाहत का अनुचित फायदा न उठा ले—इस दृष्टि से आपके जागरूक रहने की भी जरूरत है और उदार रहने के लिए? दूसरों की सेवा करने के लिए मैं आपसे कब मना करता हूँ? दूसरों की सहायता करने के लिए मैं आपसे कब मना करता हूँ? लेकिन मैं यह कहता हूँ कि आप ऐसा मत कीजिए कि आपकी सद्भावना और उदारता का लोग अनुचित लाभ उठा जाएँ और आपको उल्लू बनाते फिरें। ऐसा मत कीजिए। जागरूक भी रहिए और उदार भी बनिए। दोनों का समन्वय कीजिए।

🔵 आप सज्जन भी रहिए और शूरवीर भी रहिए। नहीं, हम तो सज्जन रहेंगे। सज्जन रहेंगे, तो क्या कायर बनेंगे?  सज्जन का मतलब क्या यह होता है कि कोई आदमी आपकी बहिन-बेटी से छेड़खानी करे और आपके प्रति बुरा सलूक करे तब भी आप सब कुछ देखते-सहते रहें? यही सोचते रहेंगे कि हमें क्या करना है, भगवान की मर्जी है, ऐसा ही हमारे भाग्य में लिखा है, तब आप ऐसा ही करेंगे। नहीं, सज्जन तो बनिए; लेकिन उसके साथ में अपनी शूरवीरता को गँवाइए मत। सज्जन इसीलिए हारते रहे हैं कि उन्होंने शूरवीरता गँवा दी। सज्जन हो गये, तो कायर हो गये। सज्जनता का अर्थ कायरता नहीं होता। सज्जनता के साथ में शूरता की भी प्रमुखता रहनी चाहिए। आप समग्र जीवन जिएँ। सज्जन भी बनें और शूरवीर भी बनें, उदार भी बनें और जागरूक भी बनें, नम्र भी बनें और सम्मान भी दें। इसी तरीके से जीवन में दोनों को मिला करके जियेंगे, तो बहुत अच्छा रहेगा।

🔴 आप जा ही रहे हैं तो एक और नया दृष्टिकोण बना करके जाइए कि हमारे आप सघन मित्र और सहयोगी हैं। आप गुरु-चेले की बात मत कीजिए। गुरु-चेला उसे कहते हैं, जो दिया करता है और लिया करता है। आप ऐसा मत कीजिए। आप हमारे सहयोगी और मित्र बन जाइए। मित्र मुझे बहुत पसन्द रहे हैं। मित्रों को मैं बहुत प्यार करता हूँ। क्यों? क्योंकि मित्र कीमत चुकाकर कीमत उतार देते हैं और भिखारी, गुरु-चेले? ये ऐसे ही हैं, चावल दे दिये, माला पहना दी, बस प्रसन्न हो गये। आप ऐसा मत कीजिए। आप मित्र बन जाइए हमारे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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