गुरुवार, 22 जून 2017

👉 कायाकल्प का मर्म और दर्शन (भाग 6)

🔴 यह मानकर चलिए कि आप दान देने में समर्थ हैं और आप देंगे, किसी-न को, कुछ-न देंगे। अपनी धर्मपत्नी को कुछ-न जरूर देंगे आप। उसकी योग्यता कम है, तो योग्यता बढ़ाइए। उसका स्वास्थ्य कमजोर है, तो स्वास्थ्य बढ़ाइए न। आप उसकी उन्नति का रास्ता नहीं खोलेंगे? उसके सम्मान को नहीं बढ़ाएँगे? उसके भविष्य को नहीं बढ़ाएँगे? आप ऐसा कीजिए फिर देखिए आप दानी हो जाते हैं कि नहीं।

🔵  आप भिखारी रहेंगे, तो उससे काम-वासना की बात करते रहेंगे, मीठे वचनों की बात करते रहेंगे, सहयोग की माँग करते रहेंगे, माँगते-ही रहेंगे। फिर आप हैरान होंगे और दूसरों की नजरों में हेय कहलाएँगे। फिर माँगने से मिल ही जाएगा, इसका क्या गारण्टी? गारण्टी भी नहीं है, मिलने की संभावना भी नहीं है, फिर आप ऐसी निराशा में क्यों बेवजह पापड़ बेलें। आप ऐसा क्यों नहीं कर सकते कि देने की ही बात विचार करें। देने में आप पूरी तरह समर्थ हैं। आप सद्भावनाएँ दे सकते हैं, सेवा के लिए कहीं-न से समय निकाल सकते हैं, इसी प्रकार बहुत कुछ दे सकते हैं।

🔴 आप ऐसा कीजिए, यहाँ से दानी बनकर जाइए और अपने याचक के चोले को यहीं हमारे सिर पर पटक के चले जाइए। आप अपनी मालिकी को खत्म करके सिर्फ माली होकर ही यहाँ से जाइए। अब आप मालिक होकर मत जाना। मालिक होकर चलेंगे, तब बहुत हैरान हो जाएँगे। यकीन रखिये मालिक को इतनी हैरानी, इतनी चिन्ता रहती है, जिसका कि कोई ठिकाना नहीं; लेकिन माली? माली को सारे बगीचे में खूब मेहनत करनी पड़ती है; दिन में भी मेहनत करता है, रात में भी मेहनत करता है और हैरानी का नाम नहीं। क्यों? क्योंकि वह समझता है कि यह बगीचा किसी और का है, मालिक का है और हमारा फर्ज, हमारी ड्यूटी यह है कि इन पेड़ों को अच्छे-से रखें और वह अच्छे-से रखता है, सिंचाई करता है, गुड़ाई करता है, निराई करता है, जो भी बेचारा कर सकता है, करता है।

🔵 आप सिर्फ अपने कर्तव्य और फर्ज तक अपना रिश्ता रखिए, आप इस बात के परिणामों के बारे में विचार करना बन्द कर दीजिए; क्योंकि परिणाम के बारे में कोई गारण्टी नहीं हो सकती। आप जैसा चाहते हैं, वैसी परिस्थितियाँ मिल जाएँ, इस बात की कोई गारण्टी नहीं, बिल्कुल गारण्टी नहीं। नहीं, हम मेहनत करेंगे। मेहनत पर भी कोई गारण्टी नहीं। आप इम्तहान में पास हो जाएँगे, कोई जरूरी नहीं है। आप मेहनती लड़के हैं, तो भी हो सकता है फेल हो जाएँ। आप व्यापार करने में कुशल आदमी हैं, तब भी यह हो सकता है कि कुछ महँगाई सस्ते की वजह से आपको नुकसान हो जाए। आप बहुत चौकस आदमी हैं; लेकिन फिर भी हो सकता है कि आपको बीमारी दबोच ले, चोर-उठाईगीर आपका नुकसान कर दें, आप किसी जंजाल में फँस जाएँ और अपनी अमीरी गँवा बैठें। यह सब हो सकता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://awgpskj.blogspot.in/2017/06/5.html

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