शनिवार, 13 मई 2017

👉 आत्मविश्वास की साधना

🔵 जीवन को उन्मुख होकर संसार की लहरों में बहने दीजिए। कभी लहर आप पर होकर गुजरेगी, कभी आप लहरों पर उतराएँगे। लेकिन समुद्र की गोद में उसकी तरंगों से खेलने का साहस-आत्मविश्वास आप में जाग्रत् होगा। जो अकेलेपन अथवा पानी में डूब जाने के भय से पानी में उतरता ही नहीं, जो इसी सोच-विचार में पड़ा रहता है क्या करूँ? कैसे करूँ? मैं मंजिल तक कैसे पहुँचूँगा? वह कुछ नहीं कर पाता, उसका विश्वास मर जाता है। किसी भी कार्य में लगने से पूर्व जिनके संकल्प अधूरे रहते हैं, जो संशय में पड़े रहते हैं, वे कोई बड़े काम नहीं कर पाते और कुछ करते हैं, तो उसमें असफल ही होते हैं, जिसके कारण उनका रहा-सहा विश्वास भी मर जाता है।

🔴 आत्मविश्वास की ज्योति प्रज्वलित करने के लिए उस कार्य में प्राणपण से जुट जाइए, जो आपको हितकर लगता है। जिसे आप अच्छा समझते हैं, उस काम को अपने जीवन का, स्वभाव का अभिन्न अंग बना लीजिए। इससे आपके विश्वास को बल मिलेगा लेकिन इस मार्ग में एक खतरा है- वह है सफलता-असफलता में अपना सन्तुलन खो बैठना। इसके लिए आवश्यक है कि आप सफलता-असफलता को गौण मानकर उस कार्य को प्रधान मानें। कर्म की यह निरन्तर साधना ही आप में विश्वास का अविरल स्रोत खोज निकालेगी। अपने आपको भाग्यशाली-महत्त्वपूर्ण समझने वालों को संसार भी रास्ता देता है। यह भावना अपने हृदय में कूट-कूट कर भर लें कि आपको किसी महान् उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही धरती पर भेजा गया है। आप अवश्य उस काम को करेंगे। इसी महान् श्रद्धा के बल पर आप क्या से क्या बन सकते हैं। इसी तरह के किसी महान् आदर्श को, मिशन को अपनी श्रद्धा का आधार बना लें। इस तरह की बलवती श्रद्धा आपके विश्वास को परिपुष्ट करेगी। विश्वास उनका मर जाता है, जिनके जीवन में कोई आदर्श नहीं, श्रद्धा का कोई आधार नहीं।
  
🔵 समाज की, संसार की, घर-परिवार, पड़ोस की, राष्ट्र की, किसी महान् कार्य की जो कोई भी जिम्मेदारियाँ आप पर आएँ, उन्हें सहर्ष स्वीकार कीजिए। जिम्मेदारियों को अपने कन्धे पर उठाने का संकल्प ही विश्वास की साधना का आधा काम पूरा कर देता है। स्मरण रखिए, संसार में ऐसा कोई भी काम नहीं, जिसे आप न कर सकते हों। फिर जिम्मेदारियों से क्यों डरते हैं, क्यों झिझकते हैं? इसलिए जिम्मेदारियों को निभाना सीखिए। काम करने से ही अपनी कर्मठता, अपनी शक्तियों पर विश्वास होता है।

🔴 लोगों की आलोचना से तनिक भी विचलित हुए बिना कार्य करते रहना, निर्भय होकर अपने आदर्शों को क्रियान्वित करते चलना ही आपको शोभा देता है। जीवन का आशाभरा रंगीन चित्र अपनी कल्पनाओं के पटल पर बनाइए। ध्यान रखिए-आत्मविश्वास की साधना से सृष्टि का वैभव ही नहीं, स्रष्टा के प्रेम को भी पाया जा सकता है।

🌹 डॉ प्रणव पंड्या
🌹 जीवन पथ के प्रदीप पृष्ठ 67

👉 लक्ष्मीजी का निवास

🔶 एक बूढे सेठ थे। वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव। आज यहाँ तो कल वहाँ!! 🔷 सेठ ...