शुक्रवार, 19 मई 2017

👉 साधना की गहराइयों से आता संदेश

🔵 मौन साधना की गहराइयों में एक अनुभूति मुखर हो उठी। ईश्वर से प्रतिध्वनित होकर आवाज आई। उसने कहा, ‘‘अहो! एक ऐसा प्रेम है, जो सभी को अपने में समा लेता है, जो जीवन से भी महान है, मृत्यु से भी महान है, जो सीमा नहीं जानता, जो सर्वत्र है, जो मृत्यु की उपस्थिति में है तथा जो केवल भावसंवेदना है। मैं वही प्रेम हूँ। वह प्रेम जो अनिर्वचनीय मधुरता है, जो सभी वेदनाओं का, सभी भयों का स्वागत करता है, जो सभी प्रकार की उदासीनता को दूर करता है। मैं वही प्रेम हूँ।’’

🔴 ‘‘अहो! यह एक सर्वग्राही सौंदर्य है। यह सौंदर्य सुगंधित ऊषा तथा अरुणिम संध्या में प्रस्फुटित होता है। पक्षी के कलरव तथा बाघ की गर्जना में भी यही विद्यमान है। तूफान और शांति में यही सौंदर्य विद्यमान है; किंतु यह इन सबसे अतीत है। ये सब इसके पहलू हैं। मैं सौंदर्य हूँ, एक ऐसा सौंदर्य, जो सुख तथा दुःख से अधिक गहन गंभीर है। यह आत्मा का सौंदर्य है। मैं ही वह सौंदर्य हूँ। मैं ही वह आकर्षण हूँ तथा आनंद ही मेरा स्वरूप है।’’
  
🔵 ‘‘अहो! एक जीवन है, जो प्रेम है, आनंद है! मैं वही जीवन हूँ। उस जीवन को कोई सीमित नहीं कर सकता, परिमित नहीं कर सकता। वही अनंत जीवन है, वही शाश्वत जीवन है और वह जीवन मैं ही हूँ। उसका स्वभाव शांति है और मैं स्वयं शांति हूँ-मौन की गहन गहराइयों से उपजी शांति। उसकी समग्रता में कहीं कलह नहीं है त्वरित आवागमन नहीं है। मैं वही जीवन हूँ। सूर्य और तारे इसे धारण नहीं कर सकते। इस ज्योति से अधिक प्रकाशवान और कोई ज्योति नहीं है। यह स्वयं प्रकाशित है। मैं ही वह जीवन हूँ तथा तुम मुझमें और मैं तुममें हूँ।’’

🔴 ‘‘मैं सभी भ्रांतियों के मध्य में एक ही सत्य देखता हूँ। यह दृश्य सत्य मैं ही हूँ। काल के गर्भ से उत्पन्न होकर सभी रूपधारियों में मैं ही रूप धारण करता हूँ। मैं काल का भी जन्मस्थान हूँ। इसलिए शाश्वत हूँ तथा जीव तू वही है जो मुझमें है-वही अंतरात्मा। इसलिए उठो, जागो और सभी बंधनों को छिन्न-भिन्न कर दो, तुम ही जाग्रत आत्मा हो। उठो! उठो! और जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, रुको मत। लक्ष्य जो कि प्रेम है, जो मुक्त आत्मा का आनंद है, शाश्वत ज्ञान है।’’

🌹 डॉ प्रणव पंड्या
🌹 जीवन पथ के प्रदीप पृष्ठ 76

👉 बूढ़ा पिता

🔷 किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था। परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी । बूढ़ा बाप ज...