रविवार, 7 मई 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 8 May

🔴 युग निर्माण के लिए धन की नहीं, समय की-श्रद्धा की-भावना की एवं उत्साह की आवश्यकता पड़ेगी। नोटों के बण्डल वहाँ कूड़े-करकट के समान सिद्ध होंगे। समय का दान ही सबसे बड़ा दान है। धनवान लोग अश्रद्धा और अनिच्छा रहते हुए भी मान, प्रतिफल, दबाव या अन्य किसी कारण से उपेक्षापूर्वक भी कुछ पैसा दान खाते में फेंक सकते हैं, पर समयदान केवल वही कर सकेगा जिसकी उस कार्य में श्रद्धा होगी। इस श्रद्धायुक्त समयदान में गरीब और अमीर समान रूप से भाग ले सकते हैं। युग निर्माण के लिए इसी दान की आवश्यकता पड़ेगी और आशा की जाएगी कि अपने परिवार के लोगों में से कोई इस दिशा में कंजूसी न दिखावेगा।                           

🔵 जिन्होंने समय-समय पर ममता भरा प्यार हमें दिया है, हमारी तुच्छता को भुलाकर जो आदर, सम्मान, श्रद्धा, सद्भाव, स्नेह एवं अपनत्व प्रदान किया है, उनके लिए क्या कुछ किया जाए समझ में नहीं आता? इच्छा प्रबल है कि अपना हृदय कोई बादल जैसा बना दे और उसमें प्यार का इतना जल भर दे कि जहाँ से एक बूँद स्नेह की मिली हो वहाँ एक पहर की वर्षा कर सकने का सुअवसर मिल जाए। मालूम नहीं, ऐसा संभव होगा कि नहीं। यदि संभव न हो सके तो हमारी अभिव्यंजना उन सभी तक पहुँचे जिनकी सद्भावना किसी रूप में हमें प्राप्त हुई हो। वे उदार सज्ज्न अनुभव करें कि उनके प्यार को भुलाया  नहीं गया।                                                            

🔴 सत्य रूपी प्रहलाद की रक्षा भगवान् नृसिंह स्वयं करते हैं। नृसिंह मनुष्यों में जो सिंह स्वरूप वीर पुरुष है, वे धर्मवृक्ष को गिरने न देने के लिए अपना पूरा सहयोग देते हैं। गायत्री परिवार के कार्यक्रमों के पीछे, महान् यज्ञानुष्ठान के पीछे सत्य की दैवी शक्ति मौजूद है। इसलिए हममें से किसी को भी विचलित होने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है। फिर भी प्रहलाद की तरह कठिन परीक्षा देने को तैयार रहना ही होगा।     

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 आपसी मतभेद से विनाश :-

🔵 एक बहेलिए ने एक ही तरह के पक्षियों के एक छोटे से झुंड़ को खूब मौज-मस्ती करते देखा तो उन्हें फंसाने की सोची. उसने पास के घने पेड़ के नीच...