शनिवार, 8 अप्रैल 2017

👉 ज्योतिष पुरुषार्थ का प्रबल शत्रु

🔵 नेपोलियन बोनापार्ट की प्रेमिका जेसोफाइन ने एक बार उसे एक पत्र लिखा-मैं देखती हूँ, जो फ्रांस एक दिन पुरुषार्थ के ढाँचे में पूरी तरह ढल चुका था, जिसे आपने पराक्रम का पाठ पढा़या था, आज उसी फ्रांस की नसें आपके देववाद के आश्रय के कारण शिथिल पडती जा रही है। मनुष्य अपनी भुजाओं, अपने शस्त्र पर भरोसा न करे और यह सोचे कि घडी, शकुन, देवता उसकी सहायता कर जायेंगे। मैं समझती इससे बड़कर मानवीय शक्ति का और कोई दूसरा अपमान नहीं ही सकता।

🔴 ऐसा पत्र लिखने का खास कारण था। एक समय था, जब नेपोलियन ज्योतिष पर बिल्कुल भी विश्वास नही करता था। उसके सेनापति चाहते थे कि नेपोलियन ज्योतिषियों से पूछकर कोई कदम बढा़या करे, किंतु नेपोलियन ने उनको डाँटकर कहा-ईश्वर यदि सहायक हो सकता है तो वह पराक्रमी और पुरुषार्थियों के लिए है। भाग्यवाद का आश्रय लेने वालों को पिसने और असफलता का मुँह देखने के अतिरिक्त हाथ कुछ नहीं लगता।

🔵 जब तक नेपोलियन अपने सिद्धांत पर दृढ़ रहा, तब तक वह अकेला ही दुश्मनों के छक्के छुड़ाता रहा, पर दुर्भाग्य, एक दिन वह स्वयं भी देववाद पर विश्वास करने लगा। वह पत्र उसी संदर्भ में लिखा गया था। नेपोलियन की यही ढील अंतत उसके पराजय का कारण बनी।

🔴 भारतीय तत्वदर्शन की अनेक शाखाओं में ज्योतिष का भी विधान है, पर वह विशुद्ध गणित के रूप है और उसका विकास होना चाहिए, किंतु उसके फलितार्थ सामूहिक रूप से सारी पृथ्वी और मानव जाति के जीवन को प्रभावित करते हैं। व्यक्तिगत जीवन में स्थान-स्थान पर ज्योतिष और भाग्यवाद के पुँछल्ले असफलता और पतन के ही कारण हो सकते है। नेपोलियन बोनापार्ट की तरह हमारे देश भारतवर्ष के साथ भी ऐसा ही हुआ। फलित के चक्कर में पड़कर सारे देश के पराक्रम की नसे ढीली पड गई और हमें सर्वत्र पराजय का मुँह देखना पडा। सोमनाथ का मंदिर लुटा तब ज्योतिषियों के अनुसार मुहूर्त नहीं था। यदि सैनिक उस पाखंड को न मानते तो भारत देश की यह दुर्गति न होती। आज भी ज्योतिष के चक्कर में पड़कर हमारी सफलता के सोमनाथ लुटते रहते है और हम अपनी उन्नति के लिये भाग्य का मुख ताकते खडे रहते हैं।

🔵 आज हमारे देश को अब्राहम लिंकन जैसे औंधे भाग्य को अपने पुरुषार्थ और पराक्रम से सीधा करने वाले होनहारों की आवश्यकता है। उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में गृह-युद्ध शुरू हो गया था। लगता था दोनों राज्य अलग-अलग होकर ही रहेंगे। तभी अब्राहम लिंकन ने अपना एक ऐतिहासिक निर्णय दिया कि दोनों प्रदेशों की एकता सैनिक शक्ति के द्वारा अक्षुण्ण रखी जायेगी। उसने युद्ध की सारी तैयारी कर भी ली।

🔴 उसी समय उनका एक मित्र आया। उसने कहा-महोदय! अपने निर्णय पर अमल करने से पूर्व आप ज्योतिषियों से भी राय ले लें, मैं तीन ज्योतिषियों को लेकर आया हूँ। वे पास के कमरे मैं ही आपकी प्रतीक्षा कर रहे है।

🔵 लिंकन ने सोचा ज्योतिषी कभी एक राय के नही होते इसी से सिद्ध है कि वे अंतिम सत्य नही। लिंकन ने अपने सैनिक बुलाए और कहा-इस बगल के कमरे में राष्ट्र के तीन शत्रु बैठे हैं, दरवाजा बंद कर ताला लगा दो जब तक हम विजयी होकर नहीं लौटते ताला न खोला जाए। ज्योतिषवाद के भ्रम में पड़कर लिंकन अपने पराक्रम ओर पुरुषार्थ के पथ से विचलित हो जाते तो अमेरिका एकता के युद्ध का और ही दृश्य होता। हमारे जीवन में जो पग-पग पर असफलताएँ दिखाई दे रही हैं, वह हमारे भाग्यवाद के कारण ही है, यदि हम हीन भाव को भगा दें तो जीवन संग्राम में हम भी लिंकन के समान ही सर्वत्र सफलता अर्जित कर सकते है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 127, 128

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