शनिवार, 8 अप्रैल 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 9 April

🔴 भगवान् के द्वार निजी प्रयोजनों के लिए अनेकों खटखटाते पाये जाते हैं, पर अबकी बार भगवान् ने अपना प्रयोजन पूरा करने के लिए साथी-सहयोगियों को पुकारा है। जो इसके लिए साहस जुटायेंगे वे लोक-परलोक की, सिद्धियों, विभूतियों से अलंकृत होकर रहेंगे। शान्तिकुंज के संचालकों से यही सम्पन्न किया और अपने को अति सामान्य होते हुए भी अत्यन्त महान् कहलाने का श्रेय पाया है। जाग्रत् आत्माओं से भी इन दिनों ऐसा अनुकरण करने की अपेक्षा की जा रही है।

🔵 कोरी वाणी ने कब किसका कल्याण किया है? संवेदनशील की एक ही पहचान है कि वह जो भी कहता है—आचरण से। यदि ऐसा नहीं है तो समझना चाहिए कि बुद्धि ने पुष्पित वाणी का नया जामा पहन लिया है, जो हमेशा से अप्रमाणित रहा है और रहेगा। वैभव की दीवारों और शान-शौकत की पहरेदारी में गरीबों की बिलखती आवाजें नहीं घुसा करती हैं।

🔴 भक्त वही है, जिसके लिए जन-जन का दर्द उसका अपना दर्द हो। अन्यथा वह विभक्त है—भगवान् से सर्वथा अलग-थलग। बड़े वे हैं, जिनका मन सर्वसामान्य की समस्याओं से व्याकुल रहता है। जिनकी बुद्धि इन समस्याओं के नित नये प्रभावकारी समाधान खोजती है। जिनके शरीर ने ‘अहर्निश सेवामहे’ का व्रत ले लिया है। झूठे बड़प्पन और सच्ची महानता में से एक ही चुना जा सकता है—दोनों एक साथ नहीं।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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