बुधवार, 19 अप्रैल 2017

👉 समय का सदुपयोग करें (भाग 12)

🌹 समय जो गुजर गया, फिर न मिलेगा

🔴 काम न करने का तथा किसी व्यवसाय में अभिरुचि न होने का कारण यह है कि एक सी स्थिति में रहते हुए मनुष्य को उकताहट पैदा होती है। यह स्वाभाविक भी है। मनोरंजन की आवश्यकता सभी को होती है। सन्त-महात्मा भी प्रकृति-दर्शन और तीर्थ यात्रा आदि के रूप में मनोरंजन प्राप्त किया करते हैं। यह उकताहट यदि सम्हाली न जाय तो किसी व्यसन के रूप में ही फूटती है। व्यसन की शुरुआत खाली समय में कुसंगति के कारण ही होती है।

🔵 आज-कल इस प्रकार के साधनों की किसी प्रकार की कमी नहीं है। निरुत्साह और मानसिक थकावट दूर करने के लिये विविध मनोरंजन के साधन आज बहुत बढ़ गये हैं किन्तु समय के सदुपयोग और जीवन की सार्थकता की दृष्टि से, इनमें से उपयोगी बहुत कम ही दिखाई देते हैं। अधिकांश तो धन-साध्य और मनुष्य का नैतिक पतन करने वाले ही हैं। इसलिए यह भी आवश्यक हो गया है कि जब कुछ समय श्रम से उत्पन्न थकावट को दूर करने के लिए निकालें तो यह भली-भांति विचार करलें कि यह जो समय उक्त कार्य में लगाने जा रहे हैं उसका आध्यात्मिक उत्थान और आत्म-विकास के लिये क्या सदुपयोग हो रहा है? मनोरंजन केवल प्रसुप्त वासना की पूर्ति के लिये न हो वरन् उसमें भी आत्म-कल्याण की भावना सन्निहित बनी रहे तो उस समय का उपयोग सार्थक माना जा सकता है।

🔴 फुरसत और खाली समय का उपयोग अच्छे-बुरे किसी भी काम में हो सकता है। नई-नई विद्या, कला, लेखन, शास्त्रार्थ के द्वारा नई सूझ और आध्यात्मिक बुद्धि जागृत होती है। इससे अपना व समाज दोनों का ही कल्याण होता है। सत्कर्म में लगाये हुए समय से मनुष्य का जीवन सुखी, समुन्नत तथा उदात्त बनता है। जापान की उन्नति का प्रमुख कारण फुरसत के समय का सदुपयोग ही है। वहां सरकारी काम के घण्टों के बाद का समय लोग कुटीर उद्योगों में लगाते हैं, छोटे-छोटे खिलौने, घड़ियां आदि बनाते हैं, इससे वहां की राष्ट्रीय सम्पत्ति बढ़ी है, लोगों की जीवन सुखी हुआ है और नैतिक सदाचार का प्रसार हुआ है। खाली समय का उपयोग जिस प्रकार के कार्यों में करेंगे वैसी ही उन्नति अवश्य होगी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...