रविवार, 8 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 66)

🌹 बौद्धिक क्रान्ति की तैयारी

🔴 मनुष्य शरीर में विचार ही प्रधान हैं। भावनाओं के अनुरूप ही मनुष्य का व्यक्तित्व उठता-गिरता है। वैयक्तिक जीवन की समस्त असुविधाओं और कुण्ठाओं का प्रधान कारण विचारणा का दोषयुक्त होना ही होता है। सामाजिक समस्याएं और कठिनाइयां भी जन-मानस के नीचे-ऊंचे होने पर ही उलझती-सुलझती हैं। नव-निर्माण का आधार भी विचार स्तर को ऊंचा उठाया जाना ही हो सकता है। ज्ञान से ही मुक्ति मिलती है। विवेक से ही कल्याण होता है। भावना से ही यह जड़, जगत, चेतन, ब्रह्म का मंगलमय स्वरूप परिलक्षित होने लगता है।

🔵 धरती पर स्वर्ग का अवतरण— नव-युग का आगमन बौद्धिक क्रान्ति के द्वारा ही सम्भव होगा। जन-समाज की विचारधारा को आकांक्षाओं और आदर्शों को बदल देने से युग परिवर्तन स्वयमेव उपस्थित हो जाता है। भौतिकवाद से मुंह मोड़कर यदि हम आध्यात्मिक आदर्शों को अपनालें तो मनुष्य की स्थिति देवताओं जैसी दिव्य बन सकती है और वह हर घड़ी स्वर्गीय सुख का आनंद लेता रह सकता है।

🔴 बौद्धिक क्रान्ति के लिए (1) लेखनी (2) वाणी और (3) प्रक्रिया के तीन ही माध्यम होते हैं। युग-निर्माण योजना अपने साधनों के अनुरूप इन तीनों ही माध्यमों को कार्यान्वित कर रही है। ‘‘अखण्ड-ज्योति’’ मासिक पत्रिका विचार क्रान्ति के सारे ढांचे प्रस्तुत करती रहती है और ‘‘युग-निर्माण योजना’’ पाक्षिक के द्वारा उन विचारों को कार्यान्वित किये जाने का व्यवहारिक मार्ग दर्शन होता रहता है। सिद्धान्त और कार्यक्रम—थ्योरी और प्रेक्टिस—का प्रयोजन यह दोनों पत्रिकाएं जिस सुन्दर ढंग से पूर्ण कर रही हैं उससे लाखों व्यक्ति चमत्कृत, प्रभावित, उत्साहित और कर्मरत हुए हैं।

🔵 इन्हें नियमित रूप से पढ़ने वाले ही योजना के सदस्य होते हैं। इन दो उपकरणों के माध्यम से उनका व्यक्तित्व एवं मानसिक स्तर इतना ऊंचा उठा है कि उसे देखते हुए हमें प्रस्तुत योजना बना डालने और उसे उसकी सफलता पर पूर्ण विश्वास करने का साहस हो सकता है। नव-निर्माण की दिशा में यह दो माध्यम ऐतिहासिक भूमिका उपस्थित कर रहे हैं। एक शब्द में यों भी कहा जा सकता है कि योजना शरीर के अन्तर्गत श्वास प्रश्वास की क्रिया इन्हीं दो नासारंध्रों से होती है। इन्हें ही उसका जीवन प्राण एवं मेरुदण्ड कहना चाहिये। इन्हीं से पाठकों का यह परिवार बना है। उन्हीं को सदस्य मानकर शाखा संगठनों के आगे बढ़ाया जा रहा है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 Sowing and Reaping (Investment & its Returns) (Part 3)

🔵 What is my life all about? It is about an industrious urge led by a well crafted mechanism of transforming (sowing & reaping) all...