बुधवार, 11 जनवरी 2017

👉 अध्यात्म एक प्रकार का समर (अमृतवाणी) भाग 3

पहले थ्योरी समझें

🔴 पूजा और पाठ किस चीज का नाम है? दीवार को गिरा देने का, इसी ने हमारे और भगवान के बीच में लाखों कि०मी० की दूरी खड़ी कर दी है, जिससे भगवान हमको नहीं देख सकता और हम भगवान को नहीं देख सकते। हम इस दीवार को गिराना चाहते है। उपासना का वास्तव में यही मकसद है। छेनी और हथौड़े को जिस तरह से हम दीवार गिराने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसी तरीके से अपनी सफाई करने के लिए पूजा−पाठ के, भजन के कर्मकाण्ड का, क्रियाकृत्य का उपयोग करते है। भजन उसी का उद्देश्य पूरा करता है। यह मैं आपको फिलॉसफी समझाना चाहता था। अगर आप अध्यात्म की फिलॉसफी समझ जाएँ, इस थ्योरी को समझ जाएँ तो आपको प्रेक्टिस से फायदा हो सकता है।

🔵 नहीं साहब, हम तो प्रेक्टिस में इम्तिहान देंगे, थ्योरी में नहीं देंगे, किसका इम्तिहान देना चाहते हैं? हम तो साहब वाइवा देंगे और थ्योरी के परचे आएँगे तो? थ्योरी, थ्योरी के झगड़े में हम नहीं पड़ते, हम तो आपकी सुना सकते हैं। हम फिजिक्स जानते है। देखिए ये हाइड्रोजन गैस बना दी। देखिए, ये शीशी इसमें डाली और ये शीशी इसमें डाली, बस ये पानी बन गया। अच्छा अब आप हमको साइंस में एम०एस- सी० की उपाधि दीजिए। गैस क्या होती है? गैस, गैस क्या होती है हमें नहीं मालूम। इस शीशी में से निकाला और इस शीशी में डाला, दोनों को मिलाया, पानी बन गया। अब आपको शिकायत क्या है इससे? नहीं साहब, आपको साइंस जाननी पड़ेगी , फिजिक्स पढ़नी पड़ेगी, तब सारी बातें जानेंगे। नहीं साहब, जानेंगे नहीं।

🔴 बेटे, आपको जानना चाहिए और करना चाहिए। जानकारी और करना दोनों के समन्वय का नाम एक समग्र अध्यात्मवाद होता है। मैंने आपको अध्यात्म के बारे में इन थोड़े से शब्दों में समझाने की कोशिश की कि आप क्रिया- कृत्यों के साथ साथ आत्मसंकेतोपचार की प्रक्रिया को मिलकर रखे तो हमारा उद्देश्य पूरा हो सकता है। बच्चों को यहीं करना पड़ता है। पूजा का हर काम बड़ा कठिन है। नहीं साहब! सरल बता दीजिए। सरल तो एक ही काम है और वह है मरना। मरने से सरल कोई काम नहीं है। जिंदगी, जिंदगी बड़ी कठिन है। जिंदगी के लिए आदमी को संघर्ष करना पड़ता है, लड़ना पड़ता है।

🔵 प्रगति के लिए हर आदमी को लड़ना पड़ा, संघर्ष करना पड़ा। मरने के लिए क्या करना पड़ता है? मरने के लिए तो कुछ भी नहीं करना पड़ता। छत के ऊपर चढ़कर चले जाओ और गिरो, देखो अभी खेल खत्म। गंगाजी में चले जाओ, झट से डुबकी मारना, बहते हुए चले जाओगे। बेटे, मरना ही सरल है। पाप ही मरता है, पतन ही सरल है। अपने आपका विनाश ही सरल है। दियासलाई की एक तीली से अपने घर को आग लगा दीजिए। आपका घर जो पच्चीस हजार रुपए का था, एक घटे में जलकर राख हो जाएगा। तमाशा देख लीजिए। आहा.... गुरुजी! देखिए हमारा कमाल, हमारा चमत्कार। क्या चमत्कार हैं? देखिए पच्चीस हजार रुपए का सामान था हमारे घर में, हमने दियासलाई की एक तीली से जला दिया। कमाल है न। वाह भई वाह। बहादुर को तो ऐसा, जो एक तीली से पच्चीस हजार रुपए जला दे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य 

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