बुधवार, 28 दिसंबर 2016

👉 महाकाल की चेतावनी अनसुनी न करें!

🔵 इस समय आपको भगवान् का काम करना चाहिए। दुनिया में कोई व्यक्ति भगवान् का केवल नाम लेकर ऊंचा नहीं उठा है। उसे भगवान् का काम भी करना पड़ा है। आपको भी कुछ काम करना होगा। अगर आप भगवान् का नाम लेकर अपने आपको बहकाते रहेंगे—भगवान् को बहकाते रहें तो आप इसी प्रकार खाली हाथ रहेंगे जैसे आप आज रह रहे हैं। यह आपके लिए खुली छूट है। निर्णय आपको करना है—कदम आपको ही बढ़ाना है। भगवान् काम नहीं कर सकता है, क्योंकि वह अपने आप में निराकार है। आप भगवान् का साकार रूप बनकर उनका कार्य करने का प्रयास करें।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 गुरु पूर्णिमा सन्देश-1980

🔴 बहादुरी का अर्थ एक ही है कि ऐसे पराक्रम कर गुजरना जिससे अपनी महानता उभरती है और समय, समाज और संस्कृति की छवि निखरती है। ऐसा पुरुषार्थ करने का ठीक यही समय है। सत्प्रवृत्तियों के संवर्धन और दुष्प्रवृत्तियों के उन्मूलन की जैसी आवश्यकता इन दिनों है उतनी इससे पहले कभी नहीं रही। इस दुहरे मोर्चे पर जो जितना जुझारू हो सके, समझना चाहिए कि उसने युगधर्म समझा और समय की पुकार सुनकर अगली पंक्ति में बढ़ आया।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 21 वीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य-37

🔵 दुष्ट जन गिरोह बना लेते हैं। आपस में सहयोग भी करते हैं, किन्तु तथाकथित सज्जन मात्र अपने काम से काम रखते हैं। लोकहित के प्रयोजन के लिए संगठित और कटिबद्ध होने से कतराते हैं। उनकी यही कमजोरी अन्य सभी गुणों और सामर्थ्यों को बेकार कर देती है। मन्यु की कमी ही इसका मूल कारण है। वह बहादुरी का ही काम है कि जो बुद्ध के धर्म-चक्र-प्रवर्तन और गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन में सम्मिलित होने वालों की तरह सज्जनों का समुदाय जमा कर लेते हैं।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 21 वीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य-38

👉 होशियारी और समझदारी

🔶 होशियारी अच्छी है पर समझदारी उससे भी ज्यादा अच्छी है क्योंकि समझदारी उचित अनुचित का ध्यान रखती है! 🔷 एक नगर के बाहर एक गृहस्थ महात्म...