रविवार, 25 दिसंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 57)

🌹 कला और उसका सदुपयोग

🔴 85. संजीवन विद्या का विधिवत् प्रशिक्षण— संजीवन विद्या का एक केन्द्रीय विद्यालय बनाया जाना है, जिसमें जीवन की प्रत्येक समस्या पर गहन अध्ययन करने और उन्हें सुलझाने सम्बन्धी तथ्यों को जानने का अवसर मिले। अव्यवस्था, गृह कलह, आर्थिक तंगी, विरोधियों का आक्रमण, अस्त-व्यस्त दाम्पत्य जीवन, बालकों के भविष्य निर्माण की समस्या, आत्म-कल्याण पक्ष की बाधायें, गरीबी और असफलता, चिन्ता और उद्वेग, अयोग्यता एवं अशक्ति, प्रगति पथ के अवरोध आदि अनेकों कठिनाइयों के हल व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप सुलझाने का प्रशिक्षण उस विद्यालय में रहे। स्वार्थ और परमार्थ का समन्वय करते हुए मनुष्य किस प्रकार लोक और परलोक में सुख शान्ति का अधिकारी बन सकता है यह पूरा शिक्षण मनोविज्ञान, समाज शास्त्र और लोक व्यवहार के सर्वांगपूर्ण आधार पर दिया जाय जिससे व्यक्तित्व के विकास में समुचित सहायता मिले।

🔵 ऐसे विद्यालय का अभाव बहुत खटकने वाला है। अनेकों प्रकार की शिक्षा संस्थाएं सर्वत्र मौजूद हैं पर जिन्दगी जीने की विद्या जहां सिखाई जाती हो ऐसा प्रबन्ध कहीं भी नहीं है। हमें यह कमी पूरी करनी है। अगले वर्ष से ऐसा केन्द्रीय प्रशिक्षण मथुरा में चलने लगेगा। उसका पाठ्यक्रम छह महीने का होगा। प्रयत्न यह होना चाहिये कि परिवार के सभी विचारशील लोग क्रमशः उनका लाभ उठाते चलें।

🔴 86. छोटे स्थानीय शिक्षण-सत्र—
जो लोग मथुरा नहीं पहुंच सकते और इतना लम्बा समय भी नहीं दे सकते उनके लिए एक महीना का छोटा शिक्षण-सत्र प्रत्येक केन्द्र पर चलता रहे ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। शिक्षार्थी जीवन-विद्या की पाठ्य पुस्तिकाओं के आधार पर समस्याओं को सुलझाने का ज्ञान प्राप्त करें। इस प्रकार एक महीने में 30 ट्रैक्टों का अध्ययन हो सकता है, अन्तिम दिन समावर्तन होगा। शिक्षार्थियों के ज्ञान की परीक्षा भी हुआ करेगी। यह पाठ्यक्रम भी सस्ती ट्रैक्ट पुस्तिकायें लिखकर लगभग तैयार है। इसका प्रचलन अगले कुछ महीनों में ही प्रारम्भ होगा।
🔵 इन सत्रों के चलाने के लिये जगह-जगह व्यवस्था की जाय, जिससे युग-निर्माण के लिये आवश्यक संजीवन विद्या का ज्ञान व्यापक बन सके।🔴 सद्भावनाओं को बढ़ाने के लिए हर प्रकार के प्रयत्न होने चाहिए। कुछ कार्यक्रमों का विवरण ऊपर दिया गया है। ऐसे और भी अनेक कार्य हो सकते हैं जिन्हें परिस्थितियों के अनुरूप जन-मानस में सद्भावनाएं बढ़ाने की दृष्टि से उत्साहपूर्वक कार्यान्वित करते रहना चाहिये।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 ईश्वर क्या है?

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