शनिवार, 3 दिसंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 23) 4 Dec

🌹 दुष्टता से निपटें तो किस तरह?
🔵  कोई समय था जब शासन, समाज, न्याय-व्यवस्था आदि का कोई उचित प्रबन्ध नहीं था। उस आदिमकाल में प्रतिद्वन्दियों से भी स्वयं ही भुगतना पड़ता था। यह पिछले काल की व्यवस्था थी, अब हम विकसित समाज में रह रहे हैं और यहां न्यायालयों का भी हस्तक्षेप है। अनीति की रोकथाम के लिए पुलिस का ढांचा बना हुआ है और आक्रमण किस स्तर का था? किन परिस्थितियों में बन पड़ा? इसका पर्यवेक्षण करने की गुंजाइश है, भले ही वह प्रक्रिया दोषपूर्ण हो और उसे सुधारने में समय लगे तो भी धैर्य रखना चाहिए और कानून अपने हाथ में लेने का बर्बर तरीका अपनाने की अपेक्षा, न्याय का निर्देश और समाजगत यश-अपयश के सहारे ही काम चला लेना चाहिए।

🔴  क्षमा का समर्थन यहां सिद्धांत के रूप में नहीं किया जा रहा है। किसी को अपने कृत्य पर वास्तविक पश्चात्ताप हो और भविष्य में वैसा न कर गुजरने का कोई स्पष्ट कारण हो तो क्षमा की भी अपनी उपयोगिता है, वह समर्थों द्वारा दुर्बलों पर किया गया अहसान है। किन्तु यदि आक्रान्त अपने को सबल समझकर आक्रामकता अपना रहा है तो क्षमा की बात करना दुष्ट की दुष्टता को बढ़ाना और संसार में अनीति का अधिक विस्तार होने की संभावना को अधिकाधिक प्रबल बनाना है। उसका उपचार क्षमा के नाम पर कायरता अपनाने से नहीं हो सकता।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 भावनाएँ भक्तिमार्ग में नियोजित की जायें (भाग 1)

🔶 भावनाओं की शक्ति भाप की तरह हैं यदि उसका सदुपयोग कर लिया जाय तो विशालकाय इंजन चल सकते हैं पर यदि उसे ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाय तो वह...