गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 16 Dec 2016

 🔴 संसार में सभी का स्वागत मुस्कान के साथ करें। मुस्कान आपकी आन्तरिक प्रसन्नता, सद्भावना, आत्मीयता का सिग्नल है। दुश्मन के साथ मुस्करा कर बातचीत करने से दुश्मनी के भाव नष्ट हो जाते हैं। मुस्कान के द्वारा दूषित भाव ग्रँथियाँ सहज ही नष्ट हो जाती हैं।

🔵 प्रत्येक  व्यक्ति मूल रूप से अच्छा है, बुरा नहीं। अतः किसी के गुण-दोषों से बहुत अधिक प्रभावित नहीं होना चाहिए।  गुण और दोषों का संबंध उसी तरह है, जैसे दीपक के प्रकाश में उसकी स्वयं की छाया और यह निश्चित है कि दीपक की छाया के अभाव में प्रकाश का भी अस्तित्व नहीं। दृढ़ निश्चयी व्यक्ति  में कुछ न कुछ हठीलापन होना संभव है। कर्त्तव्य के साथ थोड़ा बहुत अहंकार होना स्वाभाविक है। इस तरह के दोष छाया दोष कहे जाते हैं जिनका अस्तित्व भी स्वीकार करना आवश्यक है।

🔴 शान्तिकुञ्ज अनौचित्य की नींव हिला देने वाला एक क्रान्तिकारी विश्वविद्यालय है। यहाँ से इक्कीसवीं सदी का विशालकाय आन्दोलन प्रकट होकर ऐसा चमत्कार करेगा कि उसके आँचल में भारत ही नहीं समूचे विश्व को आश्रय मिलेगा।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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