शनिवार, 26 नवंबर 2016

👉 मैं क्या हूँ? What Am I? (भाग 40)

🌞  तीसरा अध्याय

🔴  संतोष और धैर्य धारण करो कार्य कठिन है, पर इसके द्वारा जो पुरस्कार मिलता है, उसका लाभ बड़ा भारी है। यदि वर्षों के कठिन अभ्यास और मनन द्वारा भी तुम अपने पद, सत्ता, महत्व, गौरव, शक्ति की चेतना प्राप्त कर सको, तब भी वह करना ही चाहिए। यदि तुम इन विचारों में हमसे सहमत हो, तो केवल पढ़कर ही संतुष्ट मत हो जाओ। अध्ययन करो, मनन करो, आशा करो, साहस करो और सावधानी तथा गम्भीरता के साथ इस साधन-पथ की ओर चल पड़ो।

🔵  इस पाठ का बीज मंत्र-

    'मैं' सत्ता हूँ। मन मेरे प्रकट होने का उपकरण है।
    'मैं' मन से भिन्न हूँ। उसकी सत्ता पर आश्रित नहीं हूँ।
    'मैं' मन का सेवक नहीं, शासक हूँ।
    'मैं' बुद्धि, स्वभाव, इच्छा और अन्य समस्त मानसिक उपकरणों को अपने से अलग कर सकता हूँ। तब जो कुछ शेष रह जाता है, वह 'मैं' हूँ।
    'मैं' अजर-अमर, अविकारी और एक रस हूँ।
    'मैं हूँ'।.......

🌹 क्रमशः जारी
🌹 *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Books_Articles/mai_kya_hun/part3.4

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