मंगलवार, 15 नवंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 6)

🌹 काम को टालिये नहीं:

🔵 कोई व्यक्ति यह कहकर ऋण चुकाने से इन्कार नहीं कर सकता कि साहब रुपये तो मेरी जेब में हैं परन्तु देने को जी नहीं चाहता। दुनिया ऐसे आदमी को क्या कहेगी? पास में पैसा होते हुए भी केवल यह बहाना करना कि देने की इच्छा नहीं है। यह बेवकूफी और मक्कारी दोनों का ही मिश्रण कहा जायगा। परन्तु जब हम कष्टसाध्य कर्तव्यों और कठिन कार्यों को न करने या बाद में करने को ठानते हैं तो हमारी स्थिति उस बुद्धिहीन व्यक्ति की तरह होती है।
🔴 आज का काम कल पर न टालना एक प्रशंसनीय सद्गुण है उसी प्रकार श्रम साध्य कार्य को सबसे पहले करने का निश्चय सफलता का स्वर्णिम सूत्र है। ऐसे आगत कर्तव्यों से छुटकारा नहीं पाया जा सकता। देर-सवेर उन कार्यों का पूरा करना ही पड़ता है फिर क्या जरूरी है कि हम दूसरे कामों में लगे रहकर कठिन कार्यों का बोझ अपने मन मस्तिष्क पर बनाये रखें।

🔵 सूक्ष्म दृष्टि से देखना चाहिए कि कहीं हममें कठिन कार्यों को टालने, श्रम साध्य कर्तव्यों से बचने की आदत तो नहीं पड़ गयी है। आत्म-निरीक्षण के द्वारा ऐसी स्थिति का पता चले तो दृढ़ निश्चय करना चाहिए कि जिन कार्यों को हम सबसे पीछे डालते रहे हैं उन्हें ही सबसे पहले कर लें। परीक्षा में कठिन प्रश्नों को सर्वप्रथम हल करके आसान सवालों का उत्तर उनके बाद करने की पद्धति सफलता प्राप्त करने का आसान उपाय है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 आदेश की विचित्र पालना, एक उलझन मे एक सुलझन मे

🔷 एक बार एक महात्मा जी के दरबार मे एक राहगीर आया और उसने पुछा की हॆ महात्मन सद्गुरु की आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिये? 🔶 महात्मा जी ने...