मंगलवार, 15 नवंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 19)

🌹 युग-निर्माण योजना का शत-सूत्री कार्यक्रम

🔵 15. नशेबाजी का त्याग— नशेबाजी की बुराइयों को समझाने के लिए और इस बुरी आदत को छुड़ाने के लिए सभी प्रचार साधनों का उपयोग किया जाय। पंचायतों, धार्मिक समारोहों एवं शुभ कार्यों के अवसर पर इस हानिकारक बुराई को छुड़ाने के लिए प्रतिज्ञाएं कराई जायें।

🔴 16. व्यायाम और उसका प्रशिक्षण— आसन, व्यायाम, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, खेल-कूद, सवेरे का टहलना, अंग संचालन, मालिश आदि की विधियां सिखाने के लिए ‘वर्ग’ चलाये जांय। सामूहिक व्यायाम करने के लिये जहां सम्भव हो वहां दैनिक व्यवस्था की जाय। व्यायाम अपने आप में एक सर्वांगपूर्ण चिकित्सा शास्त्र है। चारपाई पर पड़े हुए रोगी भी कुछ खास प्रकार के अंग-संचालन, हलके व्यायाम करते हुए कठिन रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। बूढ़े आदमी अपने बुढ़ापे को दस-बीस साल आगे धकेल सकते हैं। कमजोर प्रकृति के व्यक्ति, छोटे बच्चे, विद्यार्थी, किशोर, तरुण स्त्रियां, लड़कियां, यहां तक कि गर्भवती स्त्रियों के लिए भी उनकी स्थिति के उपयुक्त व्यायाम बहुत ही आशाजनक प्रतिफल उत्पन्न कर सकता है। इस प्रकार का ज्ञान हम लोग प्राप्त करें और उसको सर्व साधारण को दें। समय-समय पर ऐसे आयोजन करते रहें जिन्हें देखकर लोगों में इस प्रकार की प्रेरणा स्वयं पैदा हो।

🔵 अखाड़े, व्यायामशाला, क्रीड़ा-प्रांगण आदि स्वास्थ्य-संस्थानों की जगह-जगह स्थापना की जानी चाहिए। लाठी, भाला, तलवार, छुरा, धनुष आदि हथियार चलाने की शिक्षा जहां स्वास्थ्य सुधारती है, व्यायाम की आवश्यकता पूर्ण करती है, वहीं वह मनोबल और साहस भी बढ़ाती एवं आत्म रक्षा की क्षमता उत्पन्न करती है। इस प्रकार के प्रशिक्षण देने वाले तैयार करना तथा लोगों में उसके लिए आवश्यक उत्साह पैदा करना हमारा काम होना चाहिए। कुश्ती, दौड़, तैराकी, रस्साकशी, लम्बी कूद, ऊंची छलांग, कबड्डी, गेद आदि का दंगल, एवं प्रतियोगिता आयोजनों और पुरस्कार व्यवस्था करवाने से भी इन कार्यों में लोगों का उत्साह बढ़ता है। ऐसे सम्मेलन यदि ईर्ष्या-द्वेष से बचाये रखे जांय और गलत प्रतिस्पर्धा न होने दी जाय तो पारस्परिक प्रेम भाव बढ़ाने एवं गुण्डागर्दी के विरुद्ध एक शक्ति प्रदर्शन का भी काम दे सकते हैं।

🔴 डम्बल, मुगदर, लेजम, खींचने के स्प्रिंग, तानने के रबड़ के घेरे, गेंद बल्ला, आदि व्यायाम सम्बन्धी उपकरण तथा साहित्य हर जगह मिल सके ऐसी विक्रय व्यवस्था भी हर जगह रहनी चाहिए। ‘फर्स्ट एड’ की शिक्षा का प्रबन्ध हर जगह रहना चाहिए और उसे विधिवत् सीखने तथा रैड क्रास सोसाइटी का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए उत्साह पैदा करना चाहिए। स्काउटिंग की भी भावना और शिक्षा का प्रसार होना आवश्यक है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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