मंगलवार, 22 नवंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 12) 23 Nov

🌹 *प्रगति की महत्वपूर्ण कुंजी : नियमितता*

🔵  सुविख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजम् न तो उच्च शिक्षित थे, न ही उनके पास साधन सुविधाओं की विपुलता थी। पर्याप्त समय भी उनके पास नहीं था। मद्रास पोर्ट ट्रस्ट के कार्यालय में साधारण से क्लर्क के पद पर नौकरी करते हुए घर-परिवार, माता-पिता की देख-भाल आदि नाना विधि कार्यों को करते हुए अपने अध्ययन हेतु थोड़ा समय दे पाते थे, पर यह समय नियमित था। इस नियमबद्धता और निरन्तरता को आधार बनाकर ही वह गणित विषय में अनेकानेक शोध कर सकने में सक्षम हो सके।

🔴  प्रो. जी.एच. हार्डी तो उनके इस कार्य को देखकर आश्चर्यचकित रह गये कि यह व्यक्ति इतना व्यस्त जीवनयापन करते हुए शोध-अन्वेषण का समय साध्य कार्य कैसे कर पाता है। जिज्ञासा करने पर रामानुजम् ने बताया कि नियमितता ही मेरे शोध प्रयास में सफलता की रीढ़-रज्जु है। कालान्तर में उन्हें रायल सोसायटी का सभासद बनाया गया। जो इस क्षेत्र में अद्वितीय सम्मान है।

🔵  निःसंदेह जिन्होंने जीवन चर्या को सुनियोजित किया है वे एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी पर चढ़ते हुए वहां जा पहुंचे जहां उनके अन्यान्य साथियों के साथ तुलना करने पर प्रतीत होता है कि कदाचित किसी देव-दानव ने ही ऐसा विलक्षण चमत्कार प्रस्तुत किया है, पर वास्तविकता यह है कि उन्होंने नियमितता अपनाई। अपने समय, श्रम एवं चिन्तन को एक दिशा विशेष में संकल्पपूर्वक सुनियोजित किया।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

👉 बूढ़ा पिता

🔷 किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था। परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी । बूढ़ा बाप ज...