शुक्रवार, 5 मई 2023

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 5 May 2023

कोई नियम, निर्देश, प्रतिबन्ध या कानून मनुष्य को सदाचारी बनने के लिए विवश नहीं कर सकते। वह अपनी चतुरता से हर प्रतिबन्ध का उल्लंघन करने की तरकीब निकाल सकता है, पर यदि आत्मिक अंकुश लगा रहेगा तो बाह्य जीवन में अनेक कठिनाइयाँ होते हुए भी वह सत्य और धर्म पर स्थिर रह सकता है। उसे कोई प्रलोभन, भय या आपत्ति सत्पथ से डिगा नहीं सकती। यह आध्यात्मिक अंकुश ही हमारे उन सारे सपनों का आधार है जिनके अनुसार समाज को सभ्य बनाने और युग परिवर्तन होने की आशा की जाती है।

स्मरण रहे, सहज मौन ही हमारे ज्ञान की कसौटी है। ‘जानने वाला बोलता नहीं और बोलने वाला जानता नहीं’-इस कहावत के अनुसार जब हम सूक्ष्म रहस्यों को जान लेते हैं तो हमारी वाणी बंद हो जाती है। ज्ञान की सर्वोच्च भूमिका में सहज मौन स्वयमेव पैदा हो जाता है।  मौन मनुष्य के ज्ञान की गंभीरता का चिह्न है।

सत्य ही सब तरह से हमारे लिए उपासनीय है। सत्य के मार्ग पर प्रारंभ में कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं, किन्तु यह जीवन को उत्कृष्ट और महान् बनाने का राजमार्ग है। जिस तरह आग में तपाकर, कसौटी पर घिसकर सोने की परख होती है, उसी तरह सत्य की कसौटी पर खरा उतरने के लिए आने वाली कठिनाइयों का सामना करना ही उचित भी है और आवश्यक भी।

जो यह चाहते हैं कि कोई हमारी सहायता करे, हमें जीवन पथ पर चलने की दिशा दिखावे,  वे अंधकार में ही निवास करते हैं। ऐसी स्थिति से समाज में दासवृत्ति को जीवन और पोषण मिलता है, क्योंकि तब हम दूसरों का मुँह ताकते हैं। दूसरों से आशा करते हैं, ऐसे परावलम्बी व्यक्ति कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते, न अपनी स्वतंत्रता की रक्षा ही कर सकते हैं। हमें अपने ही पैरों पर आगे बढ़ना होगा। अपने आप ही अपनी मंजिल का रास्ता खोजना होगा, अपने पुरुषार्थ से ही अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

All World Gayatri Pariwar Official  Social Media Platform

Shantikunj WhatsApp
8439014110

Official Facebook Page

Official Twitter

Official Instagram

Youtube Channel Rishi Chintan

Youtube Channel Shantikunjvideo

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति भाग ३

👉 *जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें * 🔹 जीवन-यापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का लक्ष्य जीवन यापन ही रहता है। ...