रविवार, 2 अप्रैल 2017

👉 नवरात्रि साधना का तत्वदर्शन (भाग 4)

🔴 मित्रों! मैं आपको इस नवरात्रि अनुष्ठान के बारे में बताते हुए मूलभूत सिद्धान्तों की समीक्षा कर रहा था। यहाँ हमने आपको दबोचा है क्यों? क्योंकि आप अपने सोचने के तरीके से लेकर रहन-सहन, आहार-विहार के तरीकों को जब तक इस गलत प्रकार से अख़्तियार किये रहेंगे, सुधार और हेर फेर नहीं करेंगे तब तक आपकी एक भी समस्या हल नहीं होने वाली। नहीं गुरुजी! आप तो वरदान-आशीर्वाद देते हैं। सिद्ध पुरुष हैं। हाँ। हम वरदान भी देते हैं और आशीर्वाद भी। लोगों को चमत्कार भी दिखा देते हैं, यह बात भी सही है। पर हम देते उन्हीं को हैं जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं, पहले अपने आपको ठीक करने के लिए एक कदम आगे बढ़ाते हैं।

🔵 चमत्कार तो सिरदर्द के लिए एस्पीरिन की दवा की तरह है। आप ठीक हो जाते हैं? नहीं, आप तब तक ठीक नहीं हो सकते, जब तक पेट ठीक नहीं करेंगे। टाइमली रिली फहम देते हैं पर ताकत तो ठीक होने की अंदर से उभारनी पड़ेगी। खून हम बाहर का आपको इसलिए लगाते हैं ताकि आपका अपना सिस्टम काम करना आरंभ कर दे। वरदान-चमत्कार किसी को परावलम्बी बनाने के लिए नहीं, उसे सहारा देने के लिए ताकि वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

🔴 नवरात्रि अनुष्ठान में यही अध्यात्म के मूलभूत सिद्धान्त मैंने आपको समझाने का प्रयास किया कि आप अपने पैरों पर खड़ा होना सीखिए। अपने चिन्तन और व्यवहार को यही ढंग से रखना सीखिए। आपकी अब तक की जिन्दगी वहमों में बीत गयी। अब उनसे मुक्ति पाना सीखिए। अपने आपको दबोचना सीखिए यह नवरात्रि अनुष्ठान का तपश्चर्या वाला हिस्सा है, जिससे हमने आपको अपने आप पर नियंत्रण करना सिखाया। यह बताया कि कम खाने से शरीर का कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ ही होता है। इसलिए आपको आदतें बदलकर उपवास करना सिखाया, अस्वादव्रत समझाया। आध्यात्मिक प्रगति के रास्ते का यह पहला कदम है।

🔵 आहार संयम के बाद हमने आपको कहा था कि आपको विचारों पर संयम रखना आना चाहिए। आपको ब्रह्मचर्य से रहना चाहिए। गायत्री माता का फोटो आपने रखा था अपने सामने व उसी की आरती रोज करते रहे। क्यों कभी सोचा आपने! मूर्ति क्यों रखी है, सोचा आपने? बताइए इस चित्र व मूर्ति को देखकर कि इसकी उम्र कितनी होनी चाहिए? आपने देखा कि वह बीस साल की जवान युवती जैसी है। अस्सी साल की बुढ़िया तो नहीं है? नहीं गुरुजी वह तो उठती उम्र की जवान षोडशी दिखती है। आपका ख्याल ठीक है यह हमने जानबूझ कर बनाई है। गायत्री माता की असली उम्र तो न जाने कितनी होगी। उस उम्र की आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1992/April/v1.56

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