मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 18 April 2023

विचार क्रान्ति-जिसका अर्थ है मनुष्य की आस्था के स्तर को निकृष्टता से विरत कर उत्कृष्टता की ओर अभिमुख करना, आज की यह सबसे बड़ी आवश्यकता है।  युग की यही पुकार है। संसार का उज्ज्वल भविष्य इसी प्रक्रिया द्वारा संभव है। इतने आवश्यक एवं महत्त्वपूर्ण प्रयोजन की पूर्ति के लिए हर प्रबुद्ध व्यक्ति को कुछ सोचना ही होगा, अन्यमनस्क बैठे रहने से तो हम अपनी आत्मा के सामने कर्त्तव्यघात के अपराधी ही ठहरेंगे।

यदि आप महत्त्वाकाँक्षी हैं, जीवन में उन्नति एवं विकास का कोई ऊँचा लक्ष्य पाना चाहते हैं, तो प्रगति पथ के इन तीन शत्रुओं-आवेश, असहनशीलता तथा अदूरदर्शिता को निकाल डालिये और प्रतिक्षण सावधान रह कर श्रेय पथ पर आगे बढ़िये। आपकी आकाँक्षाएँ सफल होंगी। आपका उद्योग, उद्यम तथा परिश्रम और पुरुषार्थ फल जाएगा।

प्रभु समदर्शी है। वह सबका पिता है। उसे अपने सभी पुत्र समान रूप से प्यारे हैं। वह किसी के बीच भेदभाव नहीं बरतता। सबको समान दृष्टि से देखता है और सब पर समान कृपा रखता है। उसे पक्षपाती कहना उसकी महिमा, गरिमा और उसके ऐश्वर्य के प्रति धृष्टता करना है। अपने सुख-दुःख और अच्छी-बुरी परिस्थितियों का कारण मनुष्य स्वयं है, परमात्मा अथवा अन्य कोई व्यक्ति, शक्ति अथवा वस्तु नहीं।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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