शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021

👉 मानवता का विशिष्ट लक्षण - सहानुभूति (भाग १)

मानव-जीवन की सफलता, सौंदर्य और उपयोगिता में वृद्धि जिन नैतिक सद्गुणों से होती है, उनमें सहानुभूति का महत्व कम नहीं है। शक्ति , सत्यनिष्ठा, व्यवस्था, सच्चाई कर्म-निष्ठा, निष्पक्षता, मितव्ययिता और आत्म-विश्वास के आधार पर सम्मान मिलता है, समृद्धि प्राप्त होती है और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता के दर्शन होते हैं, किन्तु लौकिक जीवन में जो मधुरता तथा सरसता अपेक्षित है, वह सहानुभूति के अभाव में सम्भव नहीं। सहानुभूति चरित्र की वह गरिमा है, जो दूसरों का मन मोह लेने की क्षमता रखती है। इससे पराये अपने हो जाते हैं। किसी तरह की रुकावट परेशानी मनुष्य जीवन में नहीं आती। सहानुभूति से मन निर्मल होता है, पवित्रता जागती है और बुद्धि-प्रखरता से व्यक्तित्व निखर उठता है।

सन्त वेलूदलकाक्स का कथन है, “जब अपनी ओर देखो तो सख्ती से काम लो, दूसरों की ओर देखो तो नम्रता का उद्गार प्रकट करो। अनुचित छोटाकशी से परहेज करो- दोष-दर्शन साधारण मनुष्यों का कार्य है। इसमें सन्देह नहीं है कि दूसरों को गिराने, नीचा दिखाने की वृत्ति आत्म-हीनता की परिचायक है। निकृष्ट विचार-धारा के लोग सदैव समाज में कलह और कटुता के बीज बोते हैं। इससे सभी उनका निरादर करने लगते हैं। उनका विश्वास उठ जाता है और मुसीबत पड़ने पर कोई साथ तक नहीं देता। बीमार पड़े हैं, पर दवा का कहीं इन्तजाम नहीं । दूध माँगते हैं पर कोई पानी देने को भी तैयार नहीं होता । बड़ी दुर्दशा होती है, कोई पास तक नहीं आता। पर किया क्या जाए, जिसने दूसरों के साथ उदारता, करुणा, शालीनता, सभ्यता, मुक्तहस्तता एवं दयालुता का कभी भी रुख न अपनाया हो, उसको आड़े वक्त कोई सहयोग न करे, सहायता न दे तो इसमें आश्चर्य करने की कौन-सी बात है।

दूसरों को जीतने के लिये सहानुभूति एक रामबाण हैं। ‘सह’ का अर्थ है साथ-साथ, अर्थात् उस जैसा। अनुभूति का अर्थ है अनुभव, बोध। जैसी उसकी अवस्था हो वैसी ही अपनी, इसी का नाम सहानुभूति है। एक व्यक्ति पीड़ा से छटपटा रहा है, गहरी चोट लग गई, है इससे बेचारे का पाँव टूट गया है, कष्ट के मारे तड़फड़ा रहा है। एक दूसरा व्यक्ति उसकी बगल में खड़ा है, उससे यह दृश्य देखा नहीं जाता। यह कष्ट मुझे होता तो कितनी तकलीफ होती, वह इस भावना मात्र से छटपटा उठता है। उसकी भी दशा ठीक वैसी ही हो जाती है, जैसी चोट खाये व्यक्ति की। झट डॉक्टर को बुलाता है, घाव साफ करता है और दवा लगाता है। दूसरों की कठिनाई मुसीबतों को अपना दुःख समझ कर सेवा करने का नाम सहानुभूति है। यह मानवता का उच्च नैतिक गुण है। वाल्ट विटमैन के शब्दों से यह और भी स्पष्ट हो जाता है कि सहानुभूति किसे कहते हैं। उन्होंने लिखा है, “मैं विपत्तिग्रस्त मनुष्य से यह नहीं पूछता कि तुम्हारी दशा कैसी है वरन्-मैं स्वयं भी आपदग्रस्त बन जाता हूँ।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति फरवरी 1965 पृष्ठ १५

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