मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

👉 जीवन के रंग



फूल भी हैं, शूल भी हैं, रंग जीवन में सभी हैं।
है कभी मधुमास जीवन और पतझर भी कभी है।

एक जैसा ही समय रहता नहीं है इस जगत में,
कर नहीं सकते नया कुछ जो सदा जीते विगत में,
अब नई फसलें उगाओ, स्वेदकण से सींच कर तुम,
आँसुओं से आस्तीनों को भिगोना हल नहीं है।

क्या हुआ यदि धूप भीषण है कहीं छाया नहीं है,
राह काँटों से भरी और साथ हमसाया नहीं है,
बस यही विश्वास लेकर तुम रहो चलते निरंतर,
जो रुका है हारकर वो लक्ष्य तक पहुंचा नहीं है।

बीत जाती रात भी काली, किरण जब फूटती है,
जो हुआ भयभीत तम से, चांदनी भी रूठती है,
तप से मिला संतोष होता सब सुखों से श्रेष्ठतर है,
रंग मेहँदी में नहीं आता अगर पिसती नहीं है।

सुधीर भारद्वाज

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