बुधवार, 31 मार्च 2021

👉 Chintan Ke Kshan चिंतन के क्षण 31 March 2021

◆ भगवान की शरण में जाकर अब लज्जा, भय, यह सब छोडो़ मैं अगर भगवत्कीर्तन में नाचूँ तो लोग मुझे क्या कहेंगे, यह सब भाव छोडो़ "लज्जा, घृणा और भय, इन तीनों में किसी के रहते ईश्वर नहीं मिलते। लज्जा, घृणा, भय जाति अभिमान, गुप्त रखने की इच्छा, ये सब पाश हैं। इन सब के चले जाने से जीव की मुक्ति होती है।

◇ जो अज्ञानी है, वही कहता है कि ईश्वर 'वहाँ' बहुत दूर हैं। जो ज्ञानी है, वह जानता है कि ईश्वर 'यहाँ' अत्यन्त निकट, हृदय के बीच अन्तर्यामी के रूप में विराजमान हैं, फिर उन्होंने स्वयं भिन्न भिन्न रूप भी धारण किये हैं।"

◆ दया बहुत अच्छी है। दया और माया में बडा़ अन्तर है। दया अच्छी नहीं। माया का अर्थ है आत्मियों से प्रेम अपनी स्त्री, पुत्र, भाई, बहन, भतीजा, माँ, बाप इन्हीं से प्रेम। दया अर्थात सब प्राणियों से समान प्रेम"।

◇ जब तक देहबुद्धि है, तभी तक सुख दुःख, जन्म मृत्यु, रोग शोक हैं। ये सब देह के हैं, आत्मा के नहीं। देह की मृत्यु के बाद सम्भव है वे अच्छे स्थान पर ले जायें जिस प्रकार प्रसव वेदना के बाद सन्तान की प्राप्ति! आत्मज्ञान होने पर सुख दुःख, जन्म मृत्यु स्वप्न जैसे लगते हैं।

📖 राम कृष्ण वचनामृत से

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