सोमवार, 29 मार्च 2021

👉 आज गुरु संग की होली


"गुरु के रंग में जो भी रंगा वो, तर गया जीवन सारा,
द्वार मिला है गुरु का जब से, हो गया वारा न्यारा।।"

अब की होली गुरु संग की होली, रंग गई मैं गुरु रंग की होली
आई रे, आई रे इस बार, आज गुरु संग की होली।
                   
इस रंग में जीवन रंग डाला, तन क्या हमने मन रंग डाला,
और कोई न रंग चढ़े जो, हमनें अंग अंग रंग डाला
आशीषों की बौछार, आज गुरु संग की होली।
आई रे, आई रे इस बार, आज गुरु संग की होली।1।
                
और कोई न रंग ही भाए, जब से गुरु के दर पे आए,
लाल गुलाबी नीले पीले, कोई भी ना रंग सुहाए,
श्रेष्ठ गुरु का प्यार, आज गुरु संग की होली।
आई रे, आई रे इस बार, आज गुरु संग की होली।2।
               
जन्म जन्म के कर्म सधे हैं, हम गुरु से आज मिले हैं
जन्म मरण के कितने बंधन, बरसों बाद आज कटे हैं
गुरु का है उपहार, आज गुरु संग की होली।
आई रे, आई रे इस बार, आज गुरु संग की होली।3।

डॉ आरती कैवर्त 'रितु'

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