सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

👉 तपोभूमि है गुरुवर की



तपोभूमि है गुरुवर की, यह जनजन  का गुरुधाम ।
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

गुरुकुल आरण्यक आश्रम है, होता जनकल्याण है। 
दिव्य प्रखर उर्जा गुरुवर की,संचारित अविराम है।। 
ऋषियों की यह दिव्य भूमि है, गंगा गोद ललाम। 
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

कठिन तपस्या से गुरुवर ने, जाग्रत तीर्थ बनाया।
गायत्री के महाशक्ति को,जन जन तक  पहुँचाया।।
स्वर्ण जयंती  है  शांतिकुंज की, माँ गायत्री धाम।
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

रोम रोम पुलकित हो जाता,शांतिकुंज में आने से।
अंतर्मन पुष्पित हो जाता, तीर्थ वास कर पाने से।।
जप ध्यान यज्ञ और योग यहाँ,होते रहते अविराम। 
शांतिकुंज  चैतन्य  तीर्थ  को,  बारम्बार  प्रणाम।।

उमेश यादव

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