रविवार, 1 दिसंबर 2019

👉 आत्मचिंतन के क्षण 1 Dec 2019

◆ शरीर, मन और बुद्धि तीनों में ही काम शक्ति क्रियाशील है। शौर्य, साहस पराक्रम, जीवट, उत्साह और उमंग उसकी ही विभिन्न भौतिक विशेषताएँ हैं। उत्कृष्ट विचारणाएँ उदात्त भाव सम्वेदनाएँ काम की आध्यात्मिक विशेषताएँ हैं। संयम और ऊर्ध्वगमन की साधना द्वार, काम, का रूपान्तरण होता है। रूपान्तरण का अर्थ है- सम्पूर्ण व्यक्तित्व में उल्लास का समावेश हो जाना।    

★ मानसिक क्षमता, चारित्रिक दृढ़ता ,संवेदनाएँ, उत्कृष्ट चिन्तन एवं आदर्श कार्यों को करने का जीवट आदि विषय स्थूल मस्तिष्क के नहीं हैं। चेतना की परिधि में आने  वाली इन विशिष्टताओं का विशद अध्ययन परामनोवैज्ञानिक कर रहे है इन सबके निष्कर्ष यही हैं कि प्रसुप्त शक्तियों का जागरण एवं मानसिक क्षमताओं का पूर्ण उपयोग ही जीवन की समस्त सफलताओं का मूल है। यही जीवन है।

□  प्राकृतिक जीवन जीते हुए सादा, स्वच्छ और सरल जीवन क्रम अपनाते हुए आसानी से शतायु हुआ जा सकता है तथा स्वस्थ और प्रसन्न रहा जा सकता है।    
 
■  पाप और अधर्म की दुष्प्रवृत्तियों से जो समय रहते सावधान हो गया, वही सच्चा साधक, सच्चा अध्यात्मवादी कहा जा सकता है। मोह- माया के क्षुद्र जीवन से ऊपर उठने के लिए सदाचार आवश्यक है, जो केवल अपरिपक्व, अस्थिर, क्षुद्र और छोटी- छोटी बातों में ही जीवन गवाँते रहते हैं, उन्हें अज्ञानी ही माना जायेगा।  

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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