शनिवार, 14 सितंबर 2019

👉 आध्यात्मिक तेज का प्रज्वलित पुंज होता है चिकित्सक (भाग ६६)

👉 आध्यात्मिक चिकित्सा की प्रथम कक्षा- रेकी

रेकी शक्ति को पाने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने पाँव के अगूँठे की चोट को ठीक किया। यह इनकी पहली उपचार प्रक्रिया थी। इसके बाद ये जब पर्वत से उतरकर एक सराय में रुके तो उस समय सराय मालिक के पौत्री के दाँतों में कई दिनों से सूजन थी, दर्द भी काफी ज्यादा था। डॉ. उशी ने इसे छुआ और उसी समय उसका दर्द व सूजन जाता रहा। इसके बाद तो डॉ. उशी ने रेकी के सिद्धान्तों एवं प्रयोगों का विधिवत् विकास किया। और अपने शिष्यों को इसमें प्रशिक्षित किया। डॉ. चिजिरोहयाशी हवायो तफाता एवं फिलिप ली फूरो मोती आदि लोगों ने उनके बाद इस रेकी विद्या को विश्वव्यापी बनाया।

डॉ. मेकाओ उशी ने रेकी चिकित्सक के लिए पाँच सिद्धान्त निश्चित किये थे। १. क्रोध न करना, २. चिंता से मुक्त होना, ३. कर्तव्य के प्रति ईमानदार होना, ४. जीवमात्र के प्रति प्रेम व आदर का भाव रखना एवं ५. ईश्वरीय कृपा के प्रति आभार मानना। इन पाँचों नियमों का सार यह है कि व्यक्ति अपनी नकारात्मक सोच व क्षुद्र भावनाओं से दूर रहे, क्योंकि ये नकारात्मक सोच व क्षुद्र भावनाएँ ही हैं, जिनसे न केवल देह में स्थित प्राण ऊर्जा का क्षरण होता है, बल्कि विश्वव्यापी प्राण ऊर्जा के जीवन में आने के मार्ग अवरुद्ध होते हैं। ये सभी नियम रेकी साधक को विधेयात्मक बनाते हैं, जिनकी वजह से प्राण प्रवाह नियमित रहता है।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 डॉ. प्रणव पण्ड्या
📖 आध्यात्मिक चिकित्सा एक समग्र उपचार पद्धति पृष्ठ ९२

1 टिप्पणी:

Varun ने कहा…

क्या कोई रेकी या हीलिंग का योग्य चिकित्सक बता सकते हैं जिससे मैं अपने शरीर की बीमारियों को खत्म कर सकूं कृपया मार्गदर्शन करें

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