शनिवार, 3 अगस्त 2019

👉 Moments of self-expression 3 Aug 2019

■ ये मोती देख रहे हैं आप शुभ्र, श्वेत, ओजस्वी और इसे ऐसा ही बनाए रखने के लिए क्या कुछ नहीं करते, इसे ऐसे किसी मखमल के वस्त्र में लपेट देते हैं, किसी पिटारी में अच्छे से बंद करके रखते हैं, क्यों? ताकि इन पर खरोंच न आने पाए, ताकि ये मोती टूटे न क्योंकि ये अनमोल हैं। इसी प्रकार है ये दूध। ये दूध फटे न इसलिए हम इसे गरम करके रखते हैं। ग्रीष्म ऋतु में हम इसे शीतल जल में रखते हैं, क्योंकि ये अनमोल है। ये दोनों अनमोल हैं और इसे हम सहेजकर रखते हैं। दूध हमारे तन को और पुष्ट करता है, उसी तन की सुन्दरता बढ़ाते हैं ये मोती। अब मोती और दूध की भाँति होते हैं हमारे अपनों के मन। इन्हें भी हमें सहेजकर रखना चाहिए। इनकी रक्षा भी हमें करनी चाहिए। मीठे वचन, स्नेह, आदरपूर्ण व्यवहार से इन्हें सहेजकर रखें। क्योंकि एक बार जैसे दूध फट जाए तो पुनः उसे ठीक नहीं किया जा सकता, एक बार यदि मोती टूट जाए तो कुछ भी कर लो उसे पुनः जोड़ा नहीं जा सकता, उसी प्रकार एक बार मन में भेद हो जाए तो उसे पुनः पूर्व स्थिति में ले जाना अत्यंत कठिन होता है। मन के मतों में भेद हो सकता है, किन्तु मन में भेद नहीं होना चाहिए। इसलिये अपनों के मन सहेजकर रखें। क्योंकि ये अत्यंत अनमोल होते हैं।

◇ बड़ी ऊँचाईयों पर पहुँचने के लिए हमें किसकी आवश्यकता होती है? अब इसका उत्तर बड़ा ही सरल है सीढ़ियों की। अब इसमें एक गूढ़ रहस्य छिपा है। हम जब तेजी से सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, तो क्या किसी को पीछे छोड़ देते हैं? तो क्या उसे देखकर हम उसको हीन समझ लेते हैं?? क्या उसे हीन दृष्टि से देखते हैं? यदि हम किसी को धक्का देकर आगे बढ़ें तो क्या हम उसका उपहास बनाते हैं? यदि आपका उत्तर हाँ है, तो ये बहुत बड़ी भूल है। आप सीढ़ियों में जिनसे भी मिलें, मधुर संबंध बनाए रखियेगा, संयमपूर्वक व्यवहार रखिएगा, विनम्र रहियेगा। क्योंकि जिस सीढ़ी से आप चढ़ रहे हैं, उसी सीढ़ी से पुनः आपको नीचे भी उतरना है। यदि ये सीढ़ी ही ना रही तो? अपनी विजय का उत्सव अवश्य मनाएँ, किन्तु जो पीछे छूट जाएँ उसका उपहास कभी मत करें।

★ जीवन में बहुत सारे लोग धन और बल से मूल्यांकन करते हैं किसी भी व्यक्ति का, स्वयं का भी, दूसरों का भी, पर कई बार इस धन और बल अर्जित करने की इस प्रक्रिया में हम समय, संबंध और स्वास्थ्य को पीछे छोड़ देते हैं, अनदेखा कर देते हैं, सोचते हैं कि एक बार हम धन और बल अर्जित कर लें, उसके पश्चात समय भी हमारे अनुसार चलेगा, संबंध में और मधुरता भी आएगी और स्वास्थ्य भी हमारी मुट्ठी में होगा। किन्तु इस धन के कारण हम इन तीनों को खो देते हैं, तब हमें ज्ञात होता है कि हम कितने निर्धन थे? उसके पश्चात संसार का सारा धन एकत्रित कर लीजिये, फिर भी अपना खोया हुआ समय पुनः नहीं ला सकते, ना वो संबंध, ना वो स्वास्थ्य। इसलिये इन तीनों का मूल्य समझ लीजिये, इससे पहले कि विलंब हो जाए।

◇ पौधे को देखिये कितना कोमल, कितना लचीला, यदि इस पर थोड़ा सा भी दबाव डालें तो यह झुक जाता है। पौधे तो होते ही ऐसे हैं, थोड़ा सा दबाव डालोगे, झुक जाएँगे। इनके लचीलेपन के कारण। किन्तु इनका यही लचीलापन आँधियों में इन्हें टूटने से बचाता है। यदि इनके स्थान पर कोई अकड़े हुए वृक्ष को देखो तो वो पवन की तीव्र गति को वो सहन नहीं कर पाता, उसका सामना नहीं कर पाता, टूटकर गिर जाता है। कुछ इसी प्रकार होते हैं हमारे संबंध भी। यदि इनमें वो लचीलापन ना हो, अभिमान की दृढ़ता हो, तो ये संबंध बिखर जाते हैं। लाइये ये लचीलापन अपने संबंधों में ताकि कल कोई समस्या आए तो ये संबंध टूटे नहीं। तनिक इस आकाश में देखिये सूर्य भी इस चन्द्रमा को देखकर झुक जाता है। हम तो साधारण से मनुष्य हैं? तो संबंध को झुकाना नहीं, संबंध के समक्ष झुकना सीखिये।

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