शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

👉 अंकुरित

एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था। जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता। पेड के उपर चढ़ता, आम खाता, खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता। उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।

बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया। कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया। आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता। एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा, "तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"

बच्चे ने आम के पेड से कहा, "अब मेरी खेलने की उम्र नही है मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"

पेड ने कहा, "तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे, इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"

उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया। उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया। आम का पेड उसकी राह देखता रहता।

एक दिन वो फिर आया और कहने लगा, "अब मुझे नौकरी मिल गई है, मेरी शादी हो चुकी है, मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"

आम के पेड ने कहा, "तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।" उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।

आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।

कोई उसे देखता भी नहीं था। पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।

फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा, "शायद आपने मुझे नही पहचाना, मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"

आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा, "पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"

वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा, "आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है, आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"

इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।

वो आम का पेड़ हमारे माता-पिता हैं।
जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।
जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।
पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,
कोई समस्या खडी हुई।

आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।

जाकर उनसे लिपटे,
उनके गले लग जाये
फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।

11 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

Bahut hi sundar prasang h isse hme prena milti h ki saccha pyar mata pita me hi milte h

Unknown ने कहा…

BAHUT RADAY SPRSHI KAHANI VASTVIK JIVANKA ASLI ROOP...

Biswanath ने कहा…

inspiring story

Unknown ने कहा…

यह कहानी अत्यंत प्रेरणादायक है, आपके द्वारा भेजे गए कहानी प्रत्येक दिन बच्चों को विद्यालय में सुनाता हूँ।धन्यवाद।आपका भाई रौशन।

Unknown ने कहा…

Dil ko lagi

बेनामी ने कहा…

This story was great story and very good think mango tree and man. I like this story and please send me another story. Thank you so much awgp.

Unknown ने कहा…

सच बात है । हम अपने रोज मर्रा के कामों में इतने व्यस्त हैं कि अपने माता पिता के साथ बातें ही नहीं करते ।

मैंने पढ़ा था कि अगर बेटा बड़ा होने के बाद भी अपने पिता के साथ बैठता है उनसे अपने विचार साँझा करता है और ओत के विचार सुनता है तो पिता कभी बूढा नहीं होता और पुत्र कभी बड़ा नहीं होता ।

विचार करियेगा 😊😊😊

Unknown ने कहा…

कभी मां-बाप को भूलना नहीं चाहिए।

Unknown ने कहा…

जी हां हमें अपने माता पिता के ऋण उऋण नहीं हो सकते

बेनामी ने कहा…

सत्य वचन महोदय, माता पिता की सेवा सच्चा कर्मयोग है।

Unknown ने कहा…

NICE

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