मंगलवार, 8 मार्च 2022

👉 बुढ़ापा

"मम्मा ये बताओ, दादा दादी आपको बहुत परेशान करते हैं ना.."
"हाँ बेटा पर क्या कर सकते हैं.. अब हैं यहाँ तो झेलना ही पड़ेगा |"
"पर क्यूँ मम्मा... क्यूँ झेलना पड़ेगा"

"तुम नही समझोगे रहने दो"

"एक काम करते हैं मम्मा, इन दोनो को चाचा चाची के घर भेज देते हैं"
"वो वहाँ दो दिन भी नही रह पायेंगे बेटा.. चाची तो दादी को देखते ही तुनक जाती है और चाचा तो तुम्हारे चाची के पल्ले से ऐसे बँधे हैं कि वो उतना ही सुनते हैं जितना चाची कहती है | वहाँ इनका कोई गुज़ारा नही होने वाला | "

"तो बुआ को बोल दो ना ये उनके भी तो माँ पापा हैं ना , वो ही ले जायें कुछ दिनों के लिए इन दोनो को| "

"तुम भी ना बड़े भोले हो बेटा.. वहाँ नही जायेंगे दादा दादी.. ढकोसला करेंगे कि हम तो बेटी के घर का पानी भी नही पी सकते तो वहाँ जा कर रहेंगे कैसे और अगर रहने को तैयार हो भी गये तो तुम्हारी बुआ के पचासों बहाने निकल आयेंगे | वो कम थोड़े ना है, वो भी तो अपनी माँ पर ही गयी है | "

"क्या मम्मा मतलब कोई इन्हे अपने साथ नही रखना चाहता | एक काम करो मम्मा इन्हे वहाँ पहुँचा दो... वो मैने टीवी पर देखा था कुछ ओल्ड ऐज होम टाइप से है.. अरे वो जो उस दिन मूवी में आ रहा था | "

"वृद्धाआश्रम कहते हैं उसे ... मैं भी थक जाती हूँ काम कर के.. सुबह उठने से सोने तक इनके नखरे झेलना... तौबा तौबा... कब तक आखिर .. मैं भी कुछ दिन और देख रही हूँ..नहीं तो तुम्हारे पापा से बात करूँगी कि वो इन दोनो को वहीं छोड़ आये |"

"हाँ यही ठीक रहेगा.. दादी दिन भर टोकती रहती है.. टीवी मत देखो, मोबाइल मत खेलो..... मैं बच्चा थोड़े ना हूँ.. बड़ा हो रहा हूँ मैं... समझदार हो रहा हूँ.. ये भी कोई बात हुयी भला. .. हुँ...ह |"

"अरे मेरा राजा बेटा...इतना गुस्सा.... दस साल के ही हो अभी.. मेरी आँखो के तारे हो तुम.... इतनी जल्दी बड़े हो जाओगे कभी सोचा ही नही था | अब देखो तुम बड़े होते जाओगे और हम बूढ़े होते जाएँगे | फिर तुम्हारी शादी करेंगे.. प्यारी सी दुल्हनियाँ लायेंगे | "

"नहीं मम्मा प्लीज़.... मैं तो बड़ा हो रहा हूँ पर आप लोग प्लीज़ बूढ़े मत होना |"
"हा हा हा क्यूँ बेटा.. बूढ़ा तो सबको ही होना है एक दिन "

"पर मम्मा आप लोग बूढ़े हो जाओगे और मेरी वाइफ आयेगी तो उसे भी ऐसे ही परेशान होना पड़ेगा ना.. वो भी तरह तरह के आईडिया सोचेगी कि कैसे आप लोगों को यहाँ से हटाया जाये..  नो मम्मा प्लीज़ नो..आप भी दादी की तरह हो जाओगी और मेरी वाइफ को परेशान करोगी .... . मैं ऐसा नही होने दूँगा... एक काम करूँगा.. मैं मेरी शादी होते ही आप दोनों के लिए ओल्ड ऐज होम बुक करवा दूँगा जहाँ आप लोग रह सकोगे और मैं और मेरी वाइफ भी चैन से रह लेंगे |"

"हुँ...ह.. हमारा घर है हमारे पास... तुम रहना अपने घर में अपनी वाइफ को लेकर | यही करोगे तुम... पाल पोस कर बड़ा कर रहे हैं और तुम हमें वृद्धा आश्रम भेजने की तैयारी कर रहे हो | वाह बेटा वाह... | "

"मम्मा.. मैं कहाँ कुछ गलत कह रहा हूँ | दादा दादी ने भी तो पापा बुआ को पाला पोसा ही होगा ना...सभी माँ बाप पालते हैं अपने बच्चों को, उसमें क्या नया है... . पर अब जब सब बड़े हो गये हैं तो कोई बूढ़े लोगों को अपने पास नही रखना चाहता तो भला मैं क्यूँ रखूँगा, परेशानी बढ़ाते हैं ये बूढ़े लोग | मैं भी नही रखूँगा और साइंटिस्ट बन कर कोई ऐसी दवा बनाऊँगा जिससे कि मैं कभी बूढ़ा ही ना हो पाऊँ और मेरे बच्चों को कोई ओल्ड ऐज होम ना ढूँढना पड़े |"

अपने बेटे की बातें सुन माँ के शरीर में सिहरन सी दौड़ गयी और जिन आँखो में कुछ देर पहले परेशानी, व्यथा, गुस्सा दिख रहा था उन्ही आँखो में अब शर्म पानी का रूप ले चुका थी |

शांतिकुंज की गतिविधियों से जुड़ने के लिए 
Shantikunj WhatsApp 8439014110 

1 टिप्पणी:

Roli Abhilasha ने कहा…

बहुत सुंदर

👉 जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति भाग ३

👉 *जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें * 🔹 जीवन-यापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का लक्ष्य जीवन यापन ही रहता है। ...