शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

👉 सुखी होने का रहस्य

सब लोग अपना अपना जीवन जीते हैं। अपनी इच्छा और अपनी बुद्धि से जीते हैं। अपने संस्कारों से जीते हैं। सही या गलत की ज्यादा परवाह नहीं करते। बस यही देखते हैं कि हमें अच्छा क्या लगता है। जो हमें अच्छा लगता है वही करते हैं, चाहे वह सही हो चाहे गलत हो।

उदाहरण- क्या शराब पीना ठीक है? आप कहेंगे, नहीं।
तो फिर कितने ही करोड़ों व्यक्ति शराब पीते हैं। क्यों? उत्तर स्पष्ट है, उनको ठीक लगता है, इसलिए पीते हैं। चाहे शराब पीना गलत ही है, पर उनकी इच्छा है इसलिए पीते हैं।
इसी तरह से सारी दुनियाँ अपनी अपनी इच्छा और बुद्धि से जी रही है। यह तो एक वर्तमान स्थिति की बात है।

परंतु यह वास्तविकता नहीं है। वास्तविकता कुछ और ही है। वह यह है, कि यदि आप ईश्वर के नियमों का भंग करेंगे, तो आपको दंड निश्चित रूप से मिलेगा।

चाहे आपकी इच्छा हो या न हो, आपको ईश्वर के संविधान का पालन करना ही होगा। ईश्वर का संविधान है, दूसरों को सुख देवें, दुख न देवें। इसलिए जहां तक हो सके दूसरों की भलाई के काम करें, इसी में आपका कल्याण है। बुराइयों से बचें। ईश्वर की कृपा का पात्र बनें। अच्छे काम करें, स्वयं सुखी रहें और दूसरों को सुख देवें। अपनी गलत इच्छाओं का नियंत्रण करें। उन्हें समाप्त करने का पूरा प्रयत्न करें। तभी आपका कल्याण होगा, अन्यथा नहीं।

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