रविवार, 3 जून 2018

👉 भारत को ईसाई बनाने का षडयन्त्र (भाग 2)

🔶 भारत में पादरियों का धर्म प्रचार हिन्दू धर्म को मिटाने का खुला षडयन्त्र है जो कि एक लम्बे अरसे से चला आ रहा है, अब उपेक्षावश और तीव्र तथा प्रबल हो गया है। ईसाई पादरियों के इस धर्म प्रचार का क्या उद्देश्य है? यह समय-समय पर किये उनके कथनों, लेखों तथा वक्तव्यों से सहज ही पता लग जाता है।

🔷 ‘‘लाइट आफ लाइफ’ केथोलिक पत्रिका के 1964 के जुलाई अंक में ईसाई नवयुवकों को परामर्श देते हुए निर्देश किया गया—‘‘ईसाई छात्रों तथा स्नातकों का यह कर्तव्य है कि वे ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिये पत्र-पत्रिकाओं में लेख लिखा करें और इस विषय में वे धर्म निरपेक्ष नीति वाली पत्र-पत्रिकाओं का लाभ उठा सकते हैं। किन्तु यह आवश्यक नहीं कि वे शुरू-शुरू में ही अपने लेखों में ईसाइयत का प्रचार करने लगें। अच्छा तो यह होगा कि पहले वे सामान्य लेख लिख कर आगे चल कर के पत्रों में खुलकर ईसाई विचारधारा का प्रचार करें।’’

🔶 यह क्या है? ईसाई नवयुवकों को धर्मनिरपेक्ष पत्र-पत्रिकाओं में घुसने और उनके माध्यम से भारत में ईसाइयत फैलाने के लिए खुला प्रोत्साहन तथा आह्वान है। इसे धर्मनिरपेक्षता का अनुचित लाभ उठाने के लिए एक षडयन्त्र के सिवाय और क्या कहा जायगा? जहां धर्मनिरपेक्षता की नीति भारत के हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सभी को एक समान तथा सामान्य राष्ट्रीय विचारधारा में लाने का प्रयत्न कर रही है, वहां विदेशी मिशनरी ईसाई नवयुवकों की धार्मिक भावनाओं को भड़का कर उन्हें अपने षडयन्त्र का सहायक अस्त्र बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं। क्या भारत के राष्ट्रीय हित में यह सहन करने योग्य बात है?

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 भारतीय संस्कृति की रक्षा कीजिए पृष्ठ 34

👉 माँसाहार का पाप पूर्व को भी पश्चिम न बना दे। (भाग 4)

🔶 गाँवों में रहने वाले लोगों को प्रायः लकड़बग्घे, बाघ या भेड़ियों का सामना करना पड़ जाता है। शहरी लोग चिड़िया−घरों में इन जन्तुओं को दे...