शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

👉 हमारी वसीयत और विरासत (भाग 129)

🌹  चौथा और अंतिम निर्देशन

🔵 ‘‘इसके लिए जो करना होगा, समय-समय पर बताते रहेंगे। योजना को असफल बनाने के लिए, इस शरीर को समाप्त करने के लिए जो दानवी प्रहार होंगे, उससे बचाते चलेंगे। पूर्व में हुए आसुरी आक्रमण की पुनरावृत्ति कभी भी किसी रूप में सज्जनों-परिजनों पर प्रहार आदि के रूप में हो सकती है। पहले की तरह सबमें हमारा संरक्षण साथ रहेगा। अब तक जो काम तुम्हारे जिम्मे दिया है, उन्हें अपने समर्थ सुयोग्य परिजनों के सुपुर्द करते चलना, ताकि मिशन के किसी काम की चिंता या जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर न रहे। जिस महा परिवर्तन का ढाँचा हमारे मन में है, उसे पूरा तो नहीं बताते, पर उसे समयानुसार प्रकट करते रहेंगे। ऐसे विषम समय, में उस रणनीति को समय से पूर्व प्रकट करने से उद्देश्य की हानि होगी।’’

🔴 इस बार हमें अधिक समय रोका नहीं गया। बैटरी चार्ज करके बहुत दिनों तक काम चलाने वाली बात नहीं बनी। उन्होंने कहा कि ‘‘हमारी ऊर्जा अब तुम्हारे पीछे अदृश्य रूप से चलती रहेगी। अब हमें एवं जिनको आवश्यकता होगी, उन ऋषियों को तुम्हारे साथ सदैव रहना और हाथ बँटाते रहना पड़ेगा। तुम्हें किसी अभाव का, आत्मिक ऊर्जा की कमी का कभी अनुभव नहीं होगा। वस्तुतः यह ५ गुनी और बढ़ जाएगी।’’

🔵 हमें विदाई दी गई और हम शान्तिकुञ्ज लौट आए। हमारी सूक्ष्मीकरण सावित्री साधना राम नवमी १९८४ से आरम्भ हो गई।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/book/My_Life_Its_Legacy_and_Message/v2.145

http://literature.awgp.org/book/My_Life_Its_Legacy_and_Message/v4.19

👉 Possible in the mist of Impossible

🔶 The life is filled so much with uncertainty, doubt and obstructions that it appears almost impossible to overcome these roadblocks. E...