रविवार, 16 जुलाई 2017

👉 आपत्कालीन धर्म

 🔴 श्रावस्ती में भयंकर अकाल पड़ा। निर्धन लोग भूख मरने लगे। भगवान् बुद्ध ने संपन्न लोगों को बुलाकर कहा- भूख से पीड़ितों को बचाने के लिए कुछ उपाय करना चाहिये। संपन्न व्यक्तियों की कमी नहीं थी, पर कोई कह रहा था- मुझे तो घाटा हो गया, फसल पैदा ही नहीं हुई आदि।

🔵 उस समय सुप्रिया नामक लड़की खड़ी हुई और बोली- मैं दूँगी, सबको अन्न। लोगों ने कहा- लड़की तू! तू तो भीख माँगकर खाती है, दूसरों को क्या खिलाएगी? सुप्रिया ने कहा- हाँ मैं आज से इन पीड़ितों के लिए घर- घर जाकर भीख माँगकर लाऊँगी, पर किसी को मरने नहीं दूँगी। उसकी बात सुनकर दर्शक स्तब्ध रह गए और सबने उसे धन एवं अन्न देना प्रारंभ कर दिया।

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 18 Aug 2017

🔴 आप दूसरों की सेवा करते समय बीज या निराशा, विरक्ति तथा उदासी के भावों को कभी मन में भी न लाया करें। सेवा में ही आनन्दित होकर सेवा किय...