बुधवार, 19 जुलाई 2017

👉 भगवान शिव और उनका तत्त्वदर्शन (भाग 4)

🔵 भगवान शंकर के मस्तिष्क के ऊपर चन्द्रमा लगा हुआ है। चन्द्रमा शांति का प्रतीक है, जो बताता है कि हमारे मस्तिष्क को संतुलित होना चाहिए, ठंडा होना चाहिए, बलिष्ठ होना चाहिए। हम पर मुसीबतें आती हैं, संकट के, कठिनाई के दिन आते हैं। हर हालत में हमें अपनी हिम्मत बना करके रखनी चाहिए कि हम हर मुसीबत का सामना करेंगे। इनसानों ने बड़ी-बड़ी मुसीबतों का सामना किया है। जो घबरा जाते हैं, उनका मस्तिष्क संतुलित नहीं रहता, गर्म हो जाता है। जिस व्यक्ति का दिमाग ठंडा है, वही सही ढंग से सोच सकता है और सही काम कर सकता है पर जिसका दिमाग गरम हो जाता है, असंतुलित हो जाता है, तो वह काम करता है जो नहीं करना चाहिए और वह सोचता है कि जो नहीं सोचना चाहिए।

🔴 मुसीबत के वक्त आज जब घटाएँ चारों ओर से हमारी ओर घुमड़ती हुई आ रही हैं, तब सबसे जरूरी बात है हम शंकर भगवान के चरणों में जाएँ। आरती उतारने के बाद मस्तक झुकाएँ और यह कहें कि आपके मस्तक पर शांति का प्रतीक, संतुलन का प्रतीक, विभेद का प्रतीक चन्द्रमा लटक रहा है। क्या आप हमको धीरज देंगे नहीं? संतुलन देंगे नहीं? क्या शांति नहीं देंगे? हिम्मत नहीं देंगे? क्या आप इतनी भी कृपा नहीं कर सकते? अगर हमने यह प्रार्थना की होती तो मजा आ जाता, फिर हम शांति ले करके आते और शंकर जी के भक्तों के तरीके से रहते।

🔵 शंकर भगवान के गले में पड़े हुए हैं काले साँप और मुण्डों की माला। काले विषधरों का इस्तेमाल इस तरीके से किया है, उन्होंने कि उनके लिए ये फायदेमन्द हो गए, उपयोगी हो गए और काटने भी नहीं पाए। शंकर जी इस शिक्षा को हर शंकर-भक्त को अपनी फिलॉसफी में सम्मिलित करना ही चाहिए कि विषैले लोगों से किस तरीके से ‘डील’ करना चाहिए, किस तरीके से उन्हें गले से लगाना चाहिए और किस तरीके से उनसे फायदा उठाना चाहिए?

🔴 शंकर जी के गले पर पड़ी मुण्डों की माला भी यह कह रही है कि जिस चेहरे को हम बीस बार शीशे में देखते हैं, सजाने-सँवारने के लिए रंग-पावडर पोतते हैं, वह मुण्डों की हड्डियों का टुकड़ा मात्र है। चमड़ी, जिसे ऊपर से सुनहरी चीजों से रंग दिया गया है और जिस बाहरी टुकड़े के रंग को हम देखते हैं, उसे उघाड़कर देखें तो मिलेगा कि इनसान की जो खूबसूरती है, उसके पीछे सिर्फ हड्डी का टुकड़ा जमा हुआ पड़ा है। हड्डियों की मुण्डमाला की यह शिक्षा है, नसीहत है मित्रो! जो हमको शंकर भगवान के चरणों में बैठकर सीखनी चाहिए।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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