बुधवार, 26 जुलाई 2017

👉 हमारा युग निर्माण सत्संकल्प (भाग 36)

🌹  चारों ओर मधुरता, स्वच्छता, सादगी और सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे।  

🔴 गंदगी स्वास्थ्य की दृष्टि से अतीव हानिकारक है। उसे बीमारी का संदेशवाहक कह सकते हैं। जहाँ गंदगी रहेगी वहाँ बीमारी जरूर पहुँचेगी। गंदगी से बीमारी को बहुत प्यार है। फूलों को तलाश करती हुई तितली जिस प्रकार फूल पर जा पहुँचती है, उसी तरह जहाँ गंदगी फल-फूल रही होगी वहाँ बीमारी भी खोज, तलाश करती हुई जरूर पहुँच जाएगी। बीमारी भी गंदगी पैदा करती है यह ठीक है, पर यह निश्चित है कि जो गंदे हैं वे स्वस्थ न रह सकेंगे। मनुष्य की मूल प्रकृति गंदगी के विरुद्ध है, इसलिए किसी व्यक्ति या पदार्थ को गंदा देखते हैं तो अनायास ही घृणा उत्पन्न होती है, वहाँ से दूर हटने का जी करता है। अस्तु जिन्हें मनुष्यता का ज्ञान है, उन्हें गंदगी हटाने का स्वभाव अपनी प्रकृति में अनिवार्यतः जोड़ देना चाहिए।

🔵 हर हालत में हर व्यक्ति को स्वच्छता के लिए स्नान आवश्यक मानना चाहिए। चेचक जैसे रोगों में मजबूरी उत्पन्न हो जाए तो बात दूसरी है, नहीं तो बीमारों को भी चिकित्सक के परामर्श से स्वच्छता का कोई न कोई रास्ता जरूर निकालते रहना चाहिए।
 
🔴 मुँह की सफाई बहुत ध्यान देने योग्य है। जीभ पर मैल की एक पर्त जमने लगती है और दाँतों की झिरी में अन्न के कण छिपे रहकर सड़न पैदा करते हैं। सबेरे कुल्ला करते समय दाँतों को भली प्रकार साफ करना चाहिए। जितने बार कुछ खाया जाए उतने ही बार कुल्ला करना चाहिए और रात को सोते समय तो जरूर ही मुँह की सफाई कर लेनी चाहिए। इससे दाँत अधिक दिन टिकेंगे, मुँह में बदबू न आएगी और लोगों को पास बैठने पर दूर हटने की आवश्यकता न पड़ेगी।

🔵 कपड़े जो शरीर को छूते हैं, उन्हें विशेष ध्यान देकर साबुन से रोज धोना चाहिए। बनियान, अंडरवियर, धोती, पायजामा आदि पसीना सोखते रहते हैं और रोज साबुन तथा धूप की अपेक्षा करते हैं। कोट जैसे कपड़े जिनका पसीने से सम्पर्क नहीं होता, नित्य धोने से छूट पा सकते हैं। भारी बिस्तरों को धोना तो कठिन पड़ेगा, पर शरीर छूने वाली चादरें जल्दी-जल्दी बदलते रहना चाहिए और बिस्तर को कड़ी धूप में हर रोज सुखाना चाहिए।
 
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/book/ikkeesaveen_sadee_ka_sanvidhan/v1.49

http://literature.awgp.org/book/ikkeesaveen_sadee_ka_sanvidhan/v2.8

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