रविवार, 18 जून 2017

👉 कायाकल्प का मर्म और दर्शन (भाग 3)

🔴 पारस उस चीज का नाम है, जिसको छू करके लोहा भी सोना बन जाता है। आप लोहा रहे हों, पहले से; आपके पास एक पारस है, जिसको आप छुएँ, तो देख सकते हैं किस तरीके से काया बदलती है? आप अभावग्रस्त दुनिया में भले ही रहे हों पहले से, आपको सारी जिंदगी यह कहते रहना पड़ा हो कि हमारे पास कमियाँ बहुत हैं, अभाव बहुत हैं, कठिनाइयाँ बहुत हैं; लेकिन यहाँ एक ऐसा कल्पवृक्ष विद्यमान है कि जिसका आप सच्चे अर्थों में सहारा लें, तो आपकी कमियाँ, अभावों और कठिनाइयों में से एक भी जिंदा रहने वाला नहीं हैं, उसका नाम कल्पवृक्ष है।

🔵 कल्पवृक्ष कोई पेड़ होता है कि नहीं, मैं नहीं जानता। न मैंने कल्पवृक्ष देखा है और न मैं आपको कल्पवृक्ष के सपने दिखाना चाहता हूँ; लेकिन अध्यात्म के बारे में मैं यकीनन कह सकता हूँ कि वह एक कल्पवृक्ष है। अध्यात्म कर्मकाण्डों को नहीं, दर्शन को कहते हैं, चिंतन को कहते हैं। जीवन में हेर-फेर कर सके, ऐसी प्रेरणा और ऐसे प्रकाश का नाम अध्यात्म है। ऐसा अध्यात्म अगर आपको मिल रहा हो तो यहाँ मिल जाए या मिलने की जो संभावनाएँ हैं, उससे आप लाभ उठा लें, तो आप यह कह सकेंगे कि हमको कल्पवृक्ष के नीचे बैठने का मौका मिल गया है। यहाँ का वातावरण कल्पवृक्ष भी है, यहाँ का वातावरण-पारस भी है और यहाँ का वातावरण अमृत भी है।

🔴 आपको रोज मरने की चिंता होती है न, मरने वाले प्राणी जिस तरीके से अपने हविश को पूरा करने के लिए, अपना पेट भरने के लिए लालायित रहते हैं, आपको वैसा कुछ करना ही नहीं पड़ेगा। जीर्घजीवियों के तरीके से आप हमेशा जिंदा रहेंगे, आपकी मौत कभी नहीं होगी। जो कभी नहीं मरते, उनको कालजयी कहते हैं। आप भी कालजयियों में अपना नाम लिखा सकते हैं। कब? जब आप अमृत पिएँ, तब। शरीर को अमर बनाने वाला अमृत कभी रहेगा, तो दुनिया में प्रकृति के कायदे खत्म हो जाएँगे। कौन दिखाई पड़ता है, बताइए? रामचंद्र जी कहीं दिखाई पड़ते हैं? श्रीकृष्ण भगवान कहीं दिखाई पड़ते हैं? हनुमान जी की कहीं आपने शक्ल देखी है?

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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